प्रेम स्वांस है प्रेम धड़कन है 
प्रेम जीवन है प्रेम रवानी है 
प्रेम अश्क हैं प्रेम सावन है 
प्रेम मौसम है प्रेम फिजा है 
प्रेम युवा है प्रेम हरदम युवा है 
प्रेम मासूम है हर छल से दूर है
प्रेम निश्छल है प्रेम निश्छल है 
प्रेम जीवन है सिर्फ जीवन है 
प्रेम मुस्कान है शान है एक पहचान है 
प्रेम शब्द में ही जान है, जान है 
प्रेम सच है प्रेम शाश्वत है 
प्रेम दिवानगी है, नशा है 
प्रेम जादू है प्रेम आँसू है 
पास रहती सदा फिर भी नहीं पास हूँ
नस नस में हो मेरी रूह में हो तुम
हर आलम में तुम हर मौसम में तुम 
सुबह में शाम में आसमा में 
चाँद में तुम हो सूरज में तुम 
तारों में तुम सारी दुनियाँ में तुम 
तुम ही तुम हाँ मेरे राँझे सिर्फ तुम ही तुम 
काशी में तुम काबा में तुम 
मकके में तुम मदीने में तुम 
चारो दिशाओं में तुम चारो धामों में तुम 
हर तरफ तुम हर तरफ तुम 
हाँ प्रिय तुम ही तुम
नदियों में तुम सागर में तुम 
मेरी पायल की झंकार में तुम 
मेरे हँसने में रोने में गाने में 
मेरी नजरों में तुम मेरे प्रियतम 
तुम ही तुम, तुम ही तुम 
मेरी कलम में तुम मेरे शब्दों में तुम 
मेरे लेखन में तुम 
मेरे दिन में मेरी रातों में 
मेरे दिल में तुम तेरे दिल में मैं 
हाँ तुम ही तुम हाँ हम ही हम 
हर रंग में हर रूप में 
हर ढंग में हर चाल में
मेरे प्रिय तुम ही तुम
मेरी तनहाई में मेरी रुसवाई में 
हर तरफ और जगह 
तुम ही तुम 
कोई जगह ही नहीं जहां नहीं हो तुम 
इस जहां में उस जहां में 
मेरे खाने में मेरे पीने में 
मेरे मिलन में 
मेरी विरह का कारण हो तुम 
मेरे साजन तुम ही तुम 
हाँ तुम ही तुम हमेशा सिर्फ तुम ही तुम
सीमा असीम

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