गतांक से आगे
रिया मुस्करा
महकने लगे हैं फ़स्ल-ए-गुल, गुलशन आबाद है !
कि सुब्हे-सुख़न आएगी , शाम-ए-नज़र आएगी !!

सुनो प्रिय 
          मेरा मन जो तुमसे कहता रहता है, सुनता रहता है, पूछता रहता है, बताता रहता है और शायद तुम्हारा मन सब सुनता है, बताता है, समझता है लेकिन प्रिय हम अब रूबरू बातें करेंगे, हम साथ बेठेंगे, हम साथ मुस्कराएँगे, हम हँसेंगे खिलखिलायेंगे, अपने दर्द दिल का अब रूबरू बताएँगे, न जाने कितना रोयेंगे या सारे गम भूल जाएँगे ....हम अब अपनी किस्मत को मनाएंगे, हम मिल जाएँगे, हम फिर से मिल जाएँगे ... सुनो प्रिय यह जो मेरे लबों पर हल्की हल्की सी मुस्कान आ जाती है शायद तुम मुझे याद करते हो ...करते हो न ? कहते हैं दिल से दिल को राह होती है तो जब मैं सुबह से लेकर अगली सुबह होने तक किसी दीवानी की तरह से तुम्हारा नाम रटती हूँ ,,पल पल में ज़ोर से आवाज देकर पुकारती हूँ न ...जरूर मेरी आवाजें आप तक पहुँचती होंगी ,, 
प्रिय तुम जानते हो न कि हम हमेशा आपके साथ हैं, हमारे हाथों में हाथ हैं ...जमाने की लाख तकलीफ़ें सहकर भी यूं ही साथ निभाएंगे और हाथों में हाथ डाले हर बाधा पार कर जाएँगे ....सुनो मेरे प्रियतम प्रेम का रंग सफ़ेद है यह स्थिर है और मन को बिना भटकाये शान्ति प्रदान करता है ...सच्चा प्रेम मन को वश में कर लेता है ,,बात बात में भड़कता नहीं, भटकता नहीं, नाराज होता नहीं, सिर्फ अपना ही सुख देखता नहीं, दर्द का वाहक नहीं बनता,,, सच्चा प्रेम सबको नसीब नहीं होता अगर हो भी जाये तो उसे कोई समझ नहीं पाता या निभा नहीं पाता...
.मेरे राँझना अब मुस्कराओ कि दिन  मिलन के आ गए हैं,,मेरे मन का बसंत महक उठा है ,,,,
यह जो तुम्हारे लबों की सिगरेट है न वो मैं ही हूँ ,,, वो जो तुम्हारे कोट का ब्रोच है न , वो मैं ही हूँ ,,,वो जो तुम्हारे आँखों का चश्मा है न वो मैं ही तो हूँ जो शान से सजी रहती हूँ तुम्हारे बदन पर ,,,प्रिय मैंने तो अपने दिल की बाजी लगा रखी है बेफिक्र होकर ,, बेपरवाह होकर ,,, हार जीत से दूर होकर ,,,, बिना किसी स्वार्थ के कि मैंने साधे रखा अपना प्रेम सच्चे दिल से हर हाल में निभाते हुए ...
इस सफर ए मोहब्बत में संग चलते रहना 
चेहरे पर मुस्कान बन खिलते रहना 
आए हिज़्र तो भी लगे यूं वस्ल है 
उम्मीद बन दिल में धड़कते रहना !!
क्रमशः 
सीमा असीम

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