गतांक से आगे 
रिया मुस्करा 
सुनो प्रिय,
बेचैन मन घबराहट से भरकर तुम्हें ढूँढने लगता है तुम्हें ज़ोर से आवाज देकर पुकारने लगता है ...प्रिय, मेरे प्रिय कहाँ हो तुम ?कहाँ हो ? कि तुम आ जाते हो ...कैसे सुन लेते हो? कैसे मिल जाते हो ? मेरे सच्चे मन के पवित्र प्रेम, तुझ पर मेरी जां निसार है ,,,तुम्हारा इंतजार है कि तुमसे प्यार है ...
 प्रिय न जाने क्यों मन उदास है,, न जाने क्यों दिल घबरा रहा है,, हद से ज्यादा परेशान है॥इतना कि जी चाहता है सब कुछ छोड़ कर दुनियाँ जहां से दूर चली जाऊँ ...रोम-रोम से बस एक ही आवाज आ रही है कि प्रिय गलत हो रहा है कहीं तभी तो मन की बेचेनियां बढ़ती जा रही हैं ...इतनी तकलीफ तो कभी न थी कभी इतनी मुश्किल न थी ...दिन रात सब एक से हो गए हैं ...मन करता है कि रब कहीं मिल जाये तो उससे जाकर पूछ लूँ कि आखिर गलत क्या था कुछ भी तो गलत नहीं था फिर क्यों इतनी परीक्षाएँ ...क्यों इतनी कठिनाई ...प्रिय न तुम गलत थे न मैं ...हम तो सही थे बस हमारे दिन थोड़े गलत हो गए कि हम इन दिनों को देखकर थोड़ा घबरा गए हैं लेकिन प्रिय तुम मत घबराना क्योंकि एक दिन सब सही हो जाएगा ,, सब ठीक हो जाएगा और हमारी सारी घबराहट बेचेनी दूर करके वही प्यारे खुशहाल और अच्छे दिन आ जाएँगे आ...दिल की सारी खुशियाँ लौट आएंगी ....दिल झूम जाएगा और दर्द कहीं गुम हो जाएगा ...बस मन का सब्र हमे फिर से उन खुशियों से मिला देगा जो हमारी हैं सिर्फ हमारी ...मुझे पता है कि खुशियों को बड़ी जल्दी नजर लग जाती है ॥हमारी खुशियों को भी किसी की बुरी नजर लगी है जो हमें इतनी तकलीफ में डाले हुए है ....
दिन रात और पल पल में सजदा करती हूँ कि मेरा प्यार यूं ही दिन पर दिन निखरता चला जाये, सवरता रहे ।भले ही मैं रहूँ न रहूँ, मिलूँ न मिलूँ लेकिन मेरे प्रिय के दिल में सदा मेरा प्रेम जीवित रहे ,सुन राँझना ये जो हमारे दिल आपस में सिले हुए हैं न इनको कोई भी उधेड़ नहीं पाएगा इनको कोई भी तोड़ नहीं पाएगा ...क्योंकि मुझे न तुम पर न खुद पर बल्कि अपने प्रेम पर विश्वास है जो किसी भी हाल में न तो कमजोर है न कभी  होगा ॥प्रिय मैंने तो तुम्हें और तुम्हारे प्रेम को अपने पलकों में सजा लिया है दिल में बसा लिया है और अंग अंग में समां लिया है ॥क्या फर्क पड़ता है कि मैं खुद को खो सी रही हूँ बस तुम मिल गए मानों रब मिल गया है ॥कहीं तो मिलेंगे हम फिर से मिलेंगे ॥ये ख्वाब आँखों पर सज गए हैं ...लब से नहीं मन से यही दुआ दिन रात करती हूँ ॥ मुझे मेरे सनम से मिला दे,,मुझे मेरे सनम से मिला दे...इस तरह से जैसे दूध और पानी ,,,मुझे  पानी और मेरे प्रिय को दूध बना दे॥ ओ रब मुझे मेरे सनम से मिला दे...ओ रब मेरा उदास दिल  खिला दे मेरी तकलीफ़ें मिटा दे ...ओ रब मुझे मेरे प्रिय से मिला दे 
मन में करुणा और नैनो में अश्रु 
एक ख़्वाहिश है सब सही करा दे 
मुझे मेरे प्रिय से मिला दे ॥क्रमशः
सीमा असीम



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