गतांक से आगे 

ये शब्द भर नहीं हैं प्रिय 

ये मेरे हृदय का अंकन हैं 

ये प्रेम भर नहीं है प्रिय 

ये तेरे माथे का चन्दन है

  सुनो प्रिय 

        मेरे पास तुम्हारे लिए बहुत सारे सवाल है लेकिन मैं जानती हूँ कि तुम्हारे पास उनके कोई जवाब नहीं हैं इसलिए ही तुमसे पूछ कर तुम्हें तुम्हारी ही नजरों में गिराना नहीं चाहती लेकिन मैं जरूर पूछूंगी एक दिन तुमसे ...वो कयामत का दिन होगा क्योंकि अब उससे पहले मैं तुमसे बात करूँ तो शायद अब संभव ही न हो सके ....मैं हमेशा सोचती हूँ कि आईना भी तो कभी शर्म से गढ़ जाता होगा .....हैं न राज ? 
राज एक बात बताओ ?
इतने समय से तुम्हारे दिये किसी भी शब्द के बिना भी मैं अपने सारे शब्द तुम्हें दे रही हूँ ...अपना सारा समय ...अपने सारे अहसास ...अपनी वफा ...अपनी खुशियाँ ॥अपना पल पल ॥प्रतिफल सब तुम्हारे लिए और तुम्हारे पास एक पल का समय भी मेरे लिए नहीं है न ?तभी तो मैं सालों से अकेले रिश्ते को निभा रही हूँ ...तुम सिर्फ रिश्तों का फायदा उठाना चाहते हो ....क्या तुम मुझे इन सब का सिर्फ एक हिस्सा भर भी वापस दे सकते हो ...?
नहीं तुम नहीं दे सकते ...कभी नहीं दे सकते ...क्योंकि तुम इतने समर्थ ही नहीं हो ...न जाने तुम्हारे कितने पुण्य उदय हो गए थे उस घड़ी ॥जिस घड़ी मैं तुम्हें मिल गयी ......!
क्या तुम जानते हो ? क्या तुम्हें पता है कि मैं कितनी तकलीफ ॥दर्द सहकर सबकुछ निभा रही हूँ ...तुम्हें नाममात्र का भी अहसास है " नहीं न ....हाँ तुम्हें नहीं हो सकता राज ...तुम्हें कभी नहीं हो सकता क्योंकि तुमने मेरे दर्द को कभी महसूस ही नहीं किया ....और तुम्हें तब तक महसूस भी नहीं होगा जब तक मैं हूँ लेकिन एक दिन मैं नहीं रहूँगी ...हाँ प्रिय सब होगा चाँद, तारे, धरती, आसमा ....पर मैं कहीं नहीं मिलूँगी ......आज रात्रि के तीसरे प्रहर के अंत में मैं तुमसे वादा करती हूँ एक दिन आएगा जब तुम मुझे ढूँढने निकलोगे तब भी मैं तुम्हें कहीं नहीं मिलूँगी ...कभी नहीं ....
सुनो सनम ..सुबह हो या शाम बस तुम्हारा ही ख्याल रहता है ...रात रात भर जागकर तुम्हारे ख्वाब बुनती रहती हूँ ...न जाने कितनी कहानियाँ ...किस्से तुम्हें समर्पित करते हुए लिखती रहती हूँ  ॥सर्द हो या गरम  किसी भी बात से बेखबर बस यह सोचती हूँ कि तुम्हारे लिए ऐसा क्या कर दूँ जो तुम्हें दुनियाँ की सारी खुशियाँ दे जाये ... हर समय अपनी उँगलियों से तुम्हारा ही नाम हर जगह पर लिखती रहती हूँ क्या तुम समझते हो इन सब बातों का अर्थ ? इन सब बातों का मतलब ?
नहीं समझ सकते प्रिय ॥तुम कभी नहीं समझ सकते क्योंकि तुमने प्रेम किया ही नहीं था अगर किया होता तो मेरे दर्द को बिना कहे ही समझ जाते ....तुम तो बस खुशियों के साझीदार बन जाते हो और दर्द मेरे हिस्से कर देते हो ....

सुनो मेरे प्रियतम,,
 मैं ठहरी हुई गहरी झील हूँ 
नदियों सा बहकना भूल गयी 
तेरे प्यार में थी तेरे प्यार में हूँ 
बगावत करना भी भूल गयी !!
क्रमशः 
सीमा असीम

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