ना जाने क्यों चाहता है मेरा मन
हमेशा हरदम हरपाल
कि हो जाऊँ तुमसे इतना नाराज
चाहें फिर तुम मुझे लाख मनाओ
मैं बिलकुल न सुनू तुम्हारी बात
तुम कहते रहो और मैं पलट कर कोई जवाब भी न दूँ
फिर तुम करो लाख मिन्नतें
मुझसे बार बार
देखते रहो एकटक वैसे ही
निहारते हुए अपनी खिड़की पर
जैसे उस दिन तुम मुझे देख रहे थे
कह रहे थे बार बार
आई एएम सोर्री
सुनो क्या सॉरी कह देने भर माफ किया जा सकता है
बोलो नहीं न
लेकिन तुम्हारा दिल भी ग्लानि से भरा हुआ था
तुम घबरा गए थे न
मेरे दूर जाने के ख्याल मात्र से ही
कैसे दर्द से छलक पड़ी थी तुम्हारी आँखें
कैसे तुम रो पड़े थे और चेहरा इस कदर उतार गया था
क्या तुम जानते हो तुम्हारी यह हालत देख कर मेरा क्या हाल हो रहा था
मेरे जिस्म की जान ही निकाल गयी थी
मैं नहीं रही थी खुद में ही
कैसे गिरती पड़ती चली आई मुझे कोई होश ही नहीं था
लेकिन मैं बहुत दुखी थी तुम्हारे लिए
फिर भी मैं कभी नाराज होना चाहती हूँ
दर्द से छटपटा कर जब रो पड़ती हूँ या
तुम्हारा नाम लेकर पुकारती हूँ तो तुम
आ जाते हो सामने लेकिन
बहुत उदास और निराश
नहीं करते कोई बात
न समझा पाते हो मुझे
बल्कि खुद भी रो पड़ते हो तुम
मुझसे भी ज्यादा
हाँ मुझसे भी ज्यादा क्योंकि तुम करते हो मुझसे
बेपनाह प्यार
मुझसे भी ज्यादा गहरा है तुम्हारा प्यार
गूँजता रहता है तुम्हारा
यह कहना
आई लव यू
मुझे माफ कर देना कि
करने लगा हूँ तुम्हें बहुत ज्यादा प्यार
यही तो सच है न
हाँ यही सच है !
सीमा असीम
15,1,20
हमेशा हरदम हरपाल
कि हो जाऊँ तुमसे इतना नाराज
चाहें फिर तुम मुझे लाख मनाओ
मैं बिलकुल न सुनू तुम्हारी बात
तुम कहते रहो और मैं पलट कर कोई जवाब भी न दूँ
फिर तुम करो लाख मिन्नतें
मुझसे बार बार
देखते रहो एकटक वैसे ही
निहारते हुए अपनी खिड़की पर
जैसे उस दिन तुम मुझे देख रहे थे
कह रहे थे बार बार
आई एएम सोर्री
सुनो क्या सॉरी कह देने भर माफ किया जा सकता है
बोलो नहीं न
लेकिन तुम्हारा दिल भी ग्लानि से भरा हुआ था
तुम घबरा गए थे न
मेरे दूर जाने के ख्याल मात्र से ही
कैसे दर्द से छलक पड़ी थी तुम्हारी आँखें
कैसे तुम रो पड़े थे और चेहरा इस कदर उतार गया था
क्या तुम जानते हो तुम्हारी यह हालत देख कर मेरा क्या हाल हो रहा था
मेरे जिस्म की जान ही निकाल गयी थी
मैं नहीं रही थी खुद में ही
कैसे गिरती पड़ती चली आई मुझे कोई होश ही नहीं था
लेकिन मैं बहुत दुखी थी तुम्हारे लिए
फिर भी मैं कभी नाराज होना चाहती हूँ
दर्द से छटपटा कर जब रो पड़ती हूँ या
तुम्हारा नाम लेकर पुकारती हूँ तो तुम
आ जाते हो सामने लेकिन
बहुत उदास और निराश
नहीं करते कोई बात
न समझा पाते हो मुझे
बल्कि खुद भी रो पड़ते हो तुम
मुझसे भी ज्यादा
हाँ मुझसे भी ज्यादा क्योंकि तुम करते हो मुझसे
बेपनाह प्यार
मुझसे भी ज्यादा गहरा है तुम्हारा प्यार
गूँजता रहता है तुम्हारा
यह कहना
आई लव यू
मुझे माफ कर देना कि
करने लगा हूँ तुम्हें बहुत ज्यादा प्यार
यही तो सच है न
हाँ यही सच है !
सीमा असीम
15,1,20
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