शिकायत नहीं है मुझे तुमसे कोई
तुम जैसे हो बस वैसे ही रहना ,,,
क्यों कहूँ तुमसे कोई बात या करूँ तुमसे ढेरों गीले शिकवे जो हैं मेरे मन में मैं तो बस यही कहूँगी कि मन तो तुम्हारा भी है इसलिए जरूरी नहीं है कि वो मेरे हिसाब से चलेगा बस मैं खुश हूँ कि तुम चाहे जैसे मुझे रखना चाहों दुख दर्द में या सुख में ,,क्योंकि मैं तो वैसे ही रह लूँगी लेकिन तुम यह सोच लो कि मेरे दुख में तकलीफ तुम्हें हो जाएगी , तड़प तुम जाओगे मेरा क्या है मैं तो रो धो कर खुद को और भी ज्यादा पाक साफ कर लूँगी और उस दुख में भी अपने प्रेम को जी लूँगी लेकिन तुम ऐसा नहीं कर पाओगे न कहाँ कर पाओगे जरा से दुख में भटकने लगोगे ,, सनम यह जीवन है इसमे सुख दुख तो लगे ही रहते हैं ,हाँ बहुत दुख हैं जीवन इस नश्वर जीवन में लेकिन हम तो एक दूसरे को कोई दुख तकलीफ या आँसू तो न दें ,,,
किसी भी तरह से दिल न दुखायेँ ... मैं नहीं चाहती तुम्हें कभी कोई दुख या तकलीफ सताये ! अगर मेरे सिवा कोई और तुम्हें परेशान करता है तो वो मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है ... मैं नहीं चाहती कि कोई तुम्हारी तरफ नजर उठा कर भी देखे ....
न जाने क्यों यह मेरा दिल मुझे बेचैन करता है
बहुत दुखता है दिल जब कोई तुम्हें परेशान करता है ....
सीमा असीम
2,1,20

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