बंजारा
गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरी भारी है
ऐ ग़ाफ़िल तुझसे भी चढ़ता इक और बड़ा ब्योपारी है
क्या शक्कर मिसरी क़ंद गरी, क्या सांभर मीठा-खारी है
क्या दाख मुनक़्क़ा सोंठ मिरच, क्या केसर लौंग सुपारी है
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
अर्थ
गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरी भारी है
ऐ ग़ाफ़िल तुझसे भी चढ़ता इक और बड़ा ब्योपारी है
क्या शक्कर मिसरी क़ंद गरी, क्या सांभर मीठा-खारी है
क्या दाख मुनक़्क़ा सोंठ मिरच, क्या केसर लौंग सुपारी है
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
अर्थ
अगर तू लखपति है और तेरी दूकान में भरमार है
ओ मूर्ख! (याद रख) के तुझ से भी बड़ा एक और व्यापारी है
क्या तेरी शक्कर, मिश्री, गुड़ और मेवे, क्या तेरा मीठा और खारा आटा?
क्या तेरे अंगूर, किशमिश, अदरक और मिर्च, क्या तेरा केसर, लौंग और सुपारी?
जिस दिन बंजारे ने सामान लाद के चलने की ठान ली, तेरा सब ठाठ-बाठ बेकार पड़ा रह जाएगा
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