इत्ती सी हंसी इत्ती सी खुशी
इत्ता सा टुकड़ा चाँद  का
मुस्कुरा रहा है मेरा मन ,कितना बावरा ,दीवाना सा है मेरा मन कि पल भर में रो देता है पल भर में मुस्कुरा देता है ,क्या तुम भी मुस्कुरा रहे हो वहाँ पर जो मेरे लबों पर यहाँ महकते हुए फूलों की धूप सी खिल गयी है ,,कितना अच्छा लगता है यूं हँसते और मुस्स्कुराते हुए ! कभी खुशी में झूमना और कभी दर्द के अथाह सागर में हिलोरे लेते हुए डूबते चले जाना ! महसूस करो तब जानोगे और तुमसे क्या कहना तुम तो यूं भी महसूस कर लेते हो मेरे बिना कुछ कहे हुए और मेरी खामोशी को पढ़ते हुए ,,,हैं न ,,,

सीमा असीम
16,1,20 

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