भर आती हैं आँखें और छलक जाती हैं
बात बात पर बिना बात पर और कभी
खुशी से महक जाती हैं आँखें चमकती
हुई सी काजल के रंग में भी गुलाबी गुलाबी
यही होता है अक्सर मेरे साथ
पल भर में खुशी से नाचती हुई और
अगले ही पल दर्द से भरकर आँसू बहाती हुई
नहीं सहा जाता मुझसे , मैं नहीं सहन कर पाती हूँ
सच में बहुत मुश्किल हो जाता है कभी कभी
खुद ही खुद को समझाना क्योंकि मैं तो
सब कह देना चाहती हूँ और तुम सब छुपा लेना चाहते हो
क्यों जाने क्यों ?
क्या तुम सबकुछ मुझसे कह कर हल्का नहीं होना चाहते
क्या तुम वो सब मुझे नहीं बताना चाहते
जो तुम्हारे दिल में है
तुम्हारे मन में है
जहां प्रेम है वहाँ सब कुछ कह देना चाहिए
जैसे मैं कहना चाहती हूँ तुमसे अपने
हर पल की बातें
कि कैसे मैं आज खुश थी और कैसे दुखी
कैसे आज मैंने अपना दिन गुजारा और
कैसे मैं तुम्हें याद करती रही
अपने खाने पीने सोने जागने
आने जाने मिलने
और वे तमाम बातें मैं तुम्हें कहना चाहती हूँ
क्योंकि मैं नहीं चाहती कि हमारे बीच
एक बाल बराबर भी दूरी हो
किसी भी तरह से
आखिर हो भी तो क्यों हो
मैं तेरी ही हूँ
और तुम मेरे फिर हम अलग कहाँ हैं
एक ही हैं न तो
तुम कहो मुझसे एक एक बात पूरी सच्चाई के साथ
मत रखो अपने मन में जिससे मेरी
आँख नम हो और मैं रो पडू किसी और से तुम्हारे बारे में
सुनकर और महसूस करके
मैं कैसे कहूँ कि प्रेम में कोई दुराव छिपाव नहीं होता है
एकदम पारदर्शी होता है सबकुछ
जिससे हम देख सकें आर पार
और जी सके अपने सच्चे प्यार को
सच के साथ ,,
सीमा असीम
3,1,20
बात बात पर बिना बात पर और कभी
खुशी से महक जाती हैं आँखें चमकती
हुई सी काजल के रंग में भी गुलाबी गुलाबी
यही होता है अक्सर मेरे साथ
पल भर में खुशी से नाचती हुई और
अगले ही पल दर्द से भरकर आँसू बहाती हुई
नहीं सहा जाता मुझसे , मैं नहीं सहन कर पाती हूँ
सच में बहुत मुश्किल हो जाता है कभी कभी
खुद ही खुद को समझाना क्योंकि मैं तो
सब कह देना चाहती हूँ और तुम सब छुपा लेना चाहते हो
क्यों जाने क्यों ?
क्या तुम सबकुछ मुझसे कह कर हल्का नहीं होना चाहते
क्या तुम वो सब मुझे नहीं बताना चाहते
जो तुम्हारे दिल में है
तुम्हारे मन में है
जहां प्रेम है वहाँ सब कुछ कह देना चाहिए
जैसे मैं कहना चाहती हूँ तुमसे अपने
हर पल की बातें
कि कैसे मैं आज खुश थी और कैसे दुखी
कैसे आज मैंने अपना दिन गुजारा और
कैसे मैं तुम्हें याद करती रही
अपने खाने पीने सोने जागने
आने जाने मिलने
और वे तमाम बातें मैं तुम्हें कहना चाहती हूँ
क्योंकि मैं नहीं चाहती कि हमारे बीच
एक बाल बराबर भी दूरी हो
किसी भी तरह से
आखिर हो भी तो क्यों हो
मैं तेरी ही हूँ
और तुम मेरे फिर हम अलग कहाँ हैं
एक ही हैं न तो
तुम कहो मुझसे एक एक बात पूरी सच्चाई के साथ
मत रखो अपने मन में जिससे मेरी
आँख नम हो और मैं रो पडू किसी और से तुम्हारे बारे में
सुनकर और महसूस करके
मैं कैसे कहूँ कि प्रेम में कोई दुराव छिपाव नहीं होता है
एकदम पारदर्शी होता है सबकुछ
जिससे हम देख सकें आर पार
और जी सके अपने सच्चे प्यार को
सच के साथ ,,
सीमा असीम
3,1,20
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