क्या कहूँ तुमसे कैसे कहूँ मैं
सनम तेरे प्यार में बर्बाद हो गए
सुनो
     जब मैं तुमसे कुछ नहीं कहना चाहती हूँ फिर भी बहुत कुछ कहना है ,इतना भरा हुआ है दिल कि हर वक्त छलकता ही रहता है ...मैं इस कदर तकलीफ में हूँ ,,मेरी आत्मा को कष्ट है बेइंतिहा कष्ट ...तुम्हारे बारे में जब सोचती हूँ तो यह कष्ट, आँसू, दर्द सब मेरा चैन छीन लेते हैं ,,,और तुम्हारे सिवाय कुछ और सोचा नहीं जाता है , मेरा दर्द मुझे सारी रात मथता है और हौले हौले आँखों से ओस की तरह झरता है भीग जाता है सुबह तक पूरा तकिया ,,इतना गीला होता है कि उसे निचोड़ सकूँ ,,,मुझे एक बात बिल्कुल समझ नहीं आती कि आखिर तुम इतना दर्द मुझे दे कैसे पाते हो , कैसे मेरी आँखों में आँसू भर देते हो क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता , तुम्हें दुख नहीं होता कोई कैसे किसी को इतना सता सकता है ,क्या इसकी कोई सजा नहीं होती है ,,मन को जो चोट लगती है उसका निदान क्या है , क्या है बताओ न तुम , बोलो ,,किस तरह से हो जाते हो तुम ऐसे , मेरा प्यार, मेरा समर्पण ,,मेरे तन मन धन के स्वामी बन गए हो ॥ मेरा जो कुछ है वोहर सब तुम्हारा है लेकिन जो तुम्हारा है क्या वो मेरा है ? बताओ ,,बोलो ,,,
कितने बेपरवाह हो तुम कि
मैं तकलीफ में है और तुझे पता भी नहीं ,,,,,,
सीमा असीम
10,1,20 

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