रोते रोते थक चुकी थी आँखें
अब मुसकुराना चाहती थी
आँख बस छलक़ने ही वाली थी कि
तुम सामने आ गए सनम ...
दिल इतना तेज तो कभी नहीं धड़का था ,,आज ऐसा अहसास हुआ मानों कितने दिनों के बाद दिल में प्यार की उमंगें हिलोरे ले रही थी ,, मन मुस्कुरा उठा ,,जीने का मन करने लगा ,, सनम मैंने तो सोचा नहीं था कि मेरा प्रेम फिर से तुम्हारे मन में हरिया जायेगा और पहले से ज्यादा प्रेम उमड़ पड़ेगा और  मैं नाचने गाने को मजबूर हो जाऊँगी ,,सच है यही, तुम आ गए मेरे लिए प्रेम का सागर के लेकर मुझे उस में और भी ज्यादा गहरे तक डुबाने के लिए ,,,, तारो की भीड़ में जैसे एक अकेला चाँद होता है नवैसे ही हो तुम काली अंधेरी सर्द रात में जबकभीकोहरे को चीरतेहुएचाँद  आ जाता है न ,  मेरे प्रिय तो तुम हीलगते हो मुझे मेरे अपनेप्यारे चाँद और मैं उदास सर्द रात में भीजी खोल करमुस्कुरा उठतीहूँ कि तेरा होनाभर ही मेरेजीवन में ऊर्जा का संचार कर देता है ...सीमा असीम ,29,1,20 

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद