जब आँखों से बहती है मेरे मुस्कान
तब तुम रो देते हो मेरे सनम
मेरा सच्चा विश्वास हो तुम और मैं तुम्हारी सच्ची श्रद्धा
मैं जानती हूँ कि जब कभी मेरी आँखों से आँसू झर रहे होते हैं तब वो प्रेम होता है मेरा , इस कदर भर जाता है प्रेम मुझमें कि बहने लगता है और फिर थमता नहीं है इतना प्रेम जो तुम मुझ पर लुटाते हो, मेरे गम में जब आँसू बहाते हो, विरहा की अगन में जल जाते हो, तो पुकारने लगते हो मुझे और मैं सब बिसरा कर तुम्हारे पास दौड़ी चली आती हूँ ,, तुम मुझे जब हिलक कर गले से लगाते हो और खुशी से मुस्कुरा देते हो, तो होने लगती है आसमा से फूलों की बरसा ,,देवता मंगलगीत गा उठते हैं, हवाएँ कोमल होकर बहने लगती हैं, संसार के सारे दुख खुशी में बादल जाते हैं और मन हल्का हो कर नृत्य करने लगता है ...हे मेरे ईश्वर मैं सच हूँ और सरल भी, बस मेरी यह सरलता और सच्चाई यूं ही बनी रहे ... बना रहे यह प्यारा जग और खुशबू महकती रहे ,,,,
मैं देती जाऊँ खुशियाँ और खुशियों में डोलती रहूँ कि मेरे सच्चे विश्वास को हिलाने की ताकत किसी में कैसे हो सकती है कोई भी शक्ति मेरे विश्वास को डिगा नहीं सकती है कभी भी नहीं न इस जन्म न अगले जन्मों तक ...
जब भी तुम्हें सोचती हूँ तुम्हें पा लेती हूँ
पल भर को भी तुझसे बिछड़ती नहीं मैं
सीमा असीम
23,1, 20
तब तुम रो देते हो मेरे सनम
मेरा सच्चा विश्वास हो तुम और मैं तुम्हारी सच्ची श्रद्धा
मैं जानती हूँ कि जब कभी मेरी आँखों से आँसू झर रहे होते हैं तब वो प्रेम होता है मेरा , इस कदर भर जाता है प्रेम मुझमें कि बहने लगता है और फिर थमता नहीं है इतना प्रेम जो तुम मुझ पर लुटाते हो, मेरे गम में जब आँसू बहाते हो, विरहा की अगन में जल जाते हो, तो पुकारने लगते हो मुझे और मैं सब बिसरा कर तुम्हारे पास दौड़ी चली आती हूँ ,, तुम मुझे जब हिलक कर गले से लगाते हो और खुशी से मुस्कुरा देते हो, तो होने लगती है आसमा से फूलों की बरसा ,,देवता मंगलगीत गा उठते हैं, हवाएँ कोमल होकर बहने लगती हैं, संसार के सारे दुख खुशी में बादल जाते हैं और मन हल्का हो कर नृत्य करने लगता है ...हे मेरे ईश्वर मैं सच हूँ और सरल भी, बस मेरी यह सरलता और सच्चाई यूं ही बनी रहे ... बना रहे यह प्यारा जग और खुशबू महकती रहे ,,,,
मैं देती जाऊँ खुशियाँ और खुशियों में डोलती रहूँ कि मेरे सच्चे विश्वास को हिलाने की ताकत किसी में कैसे हो सकती है कोई भी शक्ति मेरे विश्वास को डिगा नहीं सकती है कभी भी नहीं न इस जन्म न अगले जन्मों तक ...
जब भी तुम्हें सोचती हूँ तुम्हें पा लेती हूँ
पल भर को भी तुझसे बिछड़ती नहीं मैं
सीमा असीम
23,1, 20
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