अय मेरे दिल मत घबरा मत हो उदास
कि दुनिया की हर शय घबरा उठे ...
हे मेरे ईश्वर
मैं नहीं समझ पाती कभी कि आखिर मेरी गलती क्या थी , या सजा किस लिए मिली , मैं सच हूँ न एकदम सच , क्या तुम नहीं जानते , तुम तो समझते हो मेरे मन की एक एक बात , मैं अपने तन मन और अपनी अंतरात्मा से पूरी तरह पवित्र हूँ फिर क्यों इतना दर्द , क्यों इतने दुख , क्यों इतने आँसू , क्यों इतनी तकलीफ , बताओ बोलो मेरे ईश्वर मुझे मेरे सवालों के जवाब दो , चाहिए मुझे जवाब , हाँ नहीं तो मैं मर जाऊँगी तब भी मुक्त नहीं हो पाऊँगी तड़पती रहूँगी ,आत्मा को भी कभी मुक्ति नहीं मिलेगी,,, ,कभी नहीं मिलेगी , यूं ही रोएगी जैसे आज रोती है ,, तड़पती है , मचलती और खुद को और भी ज्यादा तकलीफ देना चाहती है , और भी ज्यादा रोना चाहती है , खत्म लेना चाहती है ,, बस चाहती है तुम्हारी खुशी ,,, मेरे प्रिय ईश्वर सुनो तुम खुश तो हो न ,, मैं चाहती हूँ तुम खुश रहो , मुसकुराते रहो , हाँ मैं ईश्वर नहीं हूँ लेकिन दुआ दे सकती हूँ
मैं जानती हूँ कि मेरा सच्चा मन कभी किसी को कोई भी दुख नहीं देना चाहता ,,बिलकुल भी नहीं देना चाहता ,, चाहता है सबकी खुशी ,,, मैं उदास हूँ या दुखी हूँ कोई बात नहीं ,, शायद इसमें ही कुछ अच्छा होगा या मेरी किस्मत ही ऐसी होगी ,,, मरना तो सबको ही होता है ,, कोई एक दिन मर जाता है और कोई रोज रोज मरता है ,,,,अपनों कि खुशी की खातिर ,,, सच कहूँ तो मुझे इस दर्द और दुख में भी खुशी का अहसास होगा अगर तुम खुश हो ,,,,
मिटा लिया खुद को खत्म कर लिया
तन मन धन की परवाह नहीं मुझे ,,,
सीमा असीम
26, 1,20
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