बहती दरिया सी हूँ 
भोली चिड़िया सी हूँ 
मैं सच हूँ अगर 
तो तुम सिर्फ मेरे ,,,,
सुनो प्रिय 
             कहना चाहती हूँ तुमसे अंगीन बातें मैं बताना चाहती हूँ कि तुम आखिर कब समझोगे सच को प्रेम को और इश्क को ,,,,क्या तुम नहीं जानते कि हमेशा अपना मन अपनी नियत साफ रखो ,,इतना साफ कि तुम्हें कभी शर्मिंदगी का अहसास न हो ,,, न कभी तुम्हें मुझसे माफी मांगनी पड़े ,,कोई जरूरत नहीं है मुझसे माफी मांगने की ,,क्या कभी कोई अपनों से भी माफी मांगता है ,,क्या कोई अपनों का इस तरह से अपना बना लेता है कि कभी उससे कुछ छिपा ही न सके ,,, कह दिया करो अपने मन की हार बात मुझसे जैसे मैं कह देती हूँ ,,,जैसे मैं नहीं चाहती कभी कोई बात मैं गलत कह दूँ या तुमको ही गलत कह दूँ ,,,क्योंकि मैं कभी नहीं चाहती कि तुम्हारा कभी भी दिल दुखे या मेरी वजह से तुम्हारी आँख नम हो या आँखों से आँसू बहें ,,,,सुनो तुम मुझे दुख दर्द आँसू जो कुछ बदले में रिटर्न गिफ्ट देते हो ,,मैं वही स्वीकार कर लेती हूँ क्योंकि जिसके पास जो कुछ होता है वो ही तो देगा ,,तुम आखिर कैसे खुशियाँ ,सुख और मुस्कान दे सकते हो जबकि तुम्हारे पास यह सब नहीं है ,,
मैं अपना प्रेम से भरा मन लेकर चलती हूँ 
ताकि गुल ए गुलशन खुशबू से महकता रहे ,,,
सीमा असीम 
6,1,20 

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