प्रेम भरे उस स्पर्श की स्मृति ,,जब जब  स्पर्श किया तुमने मुझे,, याद आता है मुझे ,, तुम्हारा वो पहला स्पर्श मेरे रोम रोम को पुलकित कर रहा है कि वह पहला स्पर्श मेरे जीवन का सच में पहला स्पर्श था जिसे मेरे मन ने पहली बार महसूस किया ! क्या तुम्हें पता था कि वो स्पर्श अपूर्व था, अनुपम था , अमूल्य था ! उस स्पर्श की स्मृति से  ही मेरे सारे तन मन में अनोखी खुशी का संचार होने लगता है ,, गाने लगता है मन और तन नृत्य कर उठता है ..... क्या तुम्हें पता है कि तुम ही मेरा पहला प्यार हो जिसे मैंने अपने सच्चे मन से स्वीकार किया और जिया ! मुझे याद आते हैं फिर वे तुम्हारे स्पर्श जो हमेशा पहले स्पर्श जैसा ही  सुख देते हैं लेकिन कभी मैं उदास होती  हूँ तब चाहती हूँ कि वही सुखद स्पर्श मुझे दे दो आकर और मैं अपनी नाराजगी भूल जाऊँ .....फिर मैं पुकारती हूँ तुम्हें कि आओ और आकर मेरे गले लग जाओ, मेरे तड़पते दिल को सकूँ दे जाओ ....रात के दूसरे प्रहार में जब मुझे नींद नहीं आ रही होती है तब मैं लिखती हूँ तुम्हें , अपनी स्मृतियों में बसाये डूबती चली जाती हूँ ...सनम एक बार आओ या मुझे बुला लो कि मैं जीना चाहती हूँ जीवन, तुम्हारे स्पर्श के सहारे ,,,हाँ सनम तुम्हारे स्पर्श की अनुभूतियाँ ,, मुझमें प्रेम का संचार करती हैं और मैं प्रेम से लबालब हो जाती हूँ कि आओ संभाल लो मुझे ,,डूबे हुए मन को सहारा दो और उबार लो मुझे ..... प्रिय सुनो हमारा स्पर्श यूं ही नहीं होता है, यह हमारी सच्ची दुआओं का फल होता है  .... सुनो संधिकाल था वह जब दिन और रात मिलते हैं संधिकाल का वह तुम्हारा स्पर्श....प्रातः काल का स्पर्श और हर पल का स्पर्श याद आता है मुझे .....कि गुजारना है मुझे तुम्हारे साथ रहकर कुछ खुशियों भरे स्पर्श ....

सीमा असीम27, 1, 20xx

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