तुम मेरे हो यह ख्याल भर नहीं
हो सिर्फ मेरे यही सच है
मेरे नितांत अकेले पलों में , मैं नहीं होती हूँ अकेली ,तुम होते हो मेरे साथ कभी उदासी बनकर आ जाते हो और कभी आँखों में आँसू बनकर बहने लगते हो , मैं याद करती हूँ तुम्हें अपने हर पल में कि तुम ही हो मेरे सब कुछ और कोई नहीं , कोई भी नहीं, कभी भी नहीं,जब आधी रात को एक दिन विदा लेता है और दूसरा दिन शुरू हो जाता है,तब मैं याद करती नहीं हूँ बल्कि तुम याद आते हो जैसे कोई मंदिर का दीपक जल जाए चुपचाप ऐसे तुम आकर समा जाते हो मुझमें मैं स्तब्ध हो तुम्हें निहारती रह जाती हूँ लेकिन तुम नजर नहीं आते तुम मेरे मन में बसे रहते हो ,, तुम मेरा कोई ख्याल भर नहीं हो तुम सच हो और मुझमें बसते हो अलग नहीं हो मुझसे , पल भर को भी अलग नहीं हो ,, कहते सुनते रहते हो अपने सुख दुख मुझसे और मेरे बहते हुए आंसुओं को अपने हाथों से पोंछ देते हो प्रिय सुनो तुम जाओ कहीं भी हो मेरे ही सिर्फ मेरे ही और रहोगे मेरे जन्मों तक ,,,
क्योंकि मैं तुम्हें चाहती हूँ और तुम मुझे लेकिन मैं कुछ और नहीं चाहती सिर्फ तुम ही हो बस और तुम चाहते हो मेरा तन मन धन ,,,,,
जो मैं खुशी खुशी तुम्हें समर्पित कर देती हूँ अपनी खुशी से तुम्हारी खुशी के लिए तुम अब जो भी दो मुझे स्वीकार है तुम्हारे दिये दुख भी भी मुझे सुख का अहसास दिलाते हैं ,,,,
खुश रहना तुम यूं ही सदा
गम की छाया छु भी न पाये ...
सीमा असीम
28,1,20
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