फिर से कलियां मुस्कुरा कर खिली  है
डालियाँ झुकी झुकी जा रही हैं
सुनो प्रिय, आज मेरा दिल बार बार तुम्हें पुकार रहा है , ना जाने क्यों मन नहीं मान रहा है और जी रहा है एक बार तुमसे बात करूँ बस बात ही हो जाये तो मन बहल जायेगा और दिल जो तुम्हें पुकारे जा रहा है इसे थोड़ा सकूँ आ जायेगा ,,, मुझे लगता है यह तुम्हारे दिल की आवाज है जो मेरे दिल से निकल रही है ,, क्या तुम चाहते हो मुझसे कुछ कहना या सुनना , अगर हाँ तो करो न मुझसे कोई बात , बता दो वो सब बातें जो तुम्हें उदास करती हैं , तुम्हें निराश करती है और तुम्हारा दिल दुखा देती हैं तो कहो न मुझसे बोलो न कुछ , सब दुख खुशियों में बादल जाएँ !
करो मुझसे कोई बात कि
आज दिल पुकारता है तुम्हें ...
सीमा असीम 
30,1,20 

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