सब कुछ हमारे मन पर ही निर्भर करता है जब हम खुश होना चाहे हम खुश हो जाते हैं और दुखी होना चाहे दुखी हो जाते हैं लेकिन कभी हम अपने दुख के गुलाम होते हैं क्योंकि हम दूसरों पर खुद से ज्यादा ध्यान देने लगते हैं अपने आईने में अपने चेहरे को न देखकर सामने वाले का चेहरा देखते हैं जिसे हम खुद से ज्यादा तबज्जो देने लगते हैं बस तब हम खुद के भी नहीं रहते बल्कि उसके हो जाते हैं जिसे हम बहुत ज्यादा मान सम्मान देने लगते हैं उसके दुख में दुखी और सुख में सुखी होते हुए अपने जीवन को जान बूझ कर जकड़ लेते हैं , और उस जकड़ से बंधन से चाह कर भी छुट नहीं पाते भले ही सामने वाले को  कोई भी अंतर न पड़े !

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