सब कुछ हमारे मन पर ही निर्भर करता है जब हम खुश होना चाहे हम खुश हो जाते हैं और दुखी होना चाहे दुखी हो जाते हैं लेकिन कभी हम अपने दुख के गुलाम होते हैं क्योंकि हम दूसरों पर खुद से ज्यादा ध्यान देने लगते हैं अपने आईने में अपने चेहरे को न देखकर सामने वाले का चेहरा देखते हैं जिसे हम खुद से ज्यादा तबज्जो देने लगते हैं बस तब हम खुद के भी नहीं रहते बल्कि उसके हो जाते हैं जिसे हम बहुत ज्यादा मान सम्मान देने लगते हैं उसके दुख में दुखी और सुख में सुखी होते हुए अपने जीवन को जान बूझ कर जकड़ लेते हैं , और उस जकड़ से बंधन से चाह कर भी छुट नहीं पाते भले ही सामने वाले को कोई भी अंतर न पड़े !
प्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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