लघुकथा


प्यारा रिश्ता ____________

आज ठंड कितनी ज्यादा हो रही है ?
हाँ, मेरे तो पैर ही सुन्न पद गए हैं !
अच्छा !
मुझे ऐसा लग रहा है मानों मेरे पैरो में जान ही नहीं बची है !
अरे ऐसा क्यों कह रहे हो ? क्या बताऊँ मैं तुम्हें , जबसे यह सर्दी आई है मेरी हालत ही खराब हो गयी है ,लगता है यह सर्दी अबकी जान लेकर ही जाएगी !
नहीं नहीं ऐसा मत कहो ,देखना सब ठीक हो जाएगा !
क्या खाक ठीक हो जाएगा ,जबसे रिटायर हुआ हूँ घर में पड़ा रहता हूँ बस बैठे बैठे खाना और सो जाना ! कोई जिंदगी ही नहीं बची है ! क्यों कर देते हैं इतनी जल्दी रिटायर ? अभी मेरे हाथ पाँव सही चल रहे थे और घर में बैठते ही हजार बीमारियाँ लग गयी !
आप क्यों इतनी फिक्र करते हो ? एक दिन तो सभी को रिटायर होना ही है कोई जल्दी हो जाता है तो कोई देर से !
बस इसी बात पर ही तो गुस्सा आ रहा है कि जल्दी क्यों कर दिया ?
अब सरकार की क्या गलती उसने तो आपको आपकी उम्र के हिसाब से ही सही समय पर किया है न ? आपकी जन्मतिथि ही गलत लिखी थी तो कोई क्या कर सकता है ?
चल छोड़ यह सब बातें ! जरा सुन एक काम कर !
क्या काम ?
आज गुलगुले बना कर खिला दे बड़ा मन कर रहा है !
अब फिर जीभ चटकारे लेने लगी आपकी ! फिर कहोगे कि डायबिटीज़ बढ़ गयी ! मैं नहीं बना रही हूँ ,मुझे भी थकान हो जाती है !
मेरी प्यारी गुड़िया रानी बना कर खिला दे न !
चलो आज बना देती हूँ अगर इतना प्यार से कह रहे हो लेकिन ध्यान रखना आगे से यह चाटुकारिता नहीं चलेगी !
ओयी चाटुकारिता न कहियों !
नहीं नहीं कहूँगी ! मेरे प्यारे चटोरे पति !
हाहाहाहाहा
पूरे घर की उदासी दूर हो गयी थी बची थी तो सिर्फ हंसी और खुशी !

सीमा असीम
14,1,20 

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