प्रेम जब मन में उतर आता है... तो घंटी नहीं बजती, बस अंदर कहीं बहुत धीरे से एक रोशनी जल जाती है, और तुम रोज़ के वही काम थोड़े ज़्यादा मन से करने लगते हो। तब आईने में चेहरा वही रहता है, पर आँखों में कोई और झांकने लगता है, गुस्सा थोड़ा देर से आता है, और माफ़ करना थोड़ा जल्दी आ जाता है। प्रेम जब मन में उतर आता है, तो तुम किसी को पाना नहीं चाहते, बस ये चाहते हो कि जिस वजह से मन इतना हल्का है, वो वजह कहीं उदास न हो... सीमा असीम 10,8,26
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देवदार तले" घने पेड़ों की छाँव या देवदार तले, चलें वहाँ जहाँ दुनिया ज़रा ठहरे। न शोर हो, न कोई जल्दी हो, बस तुम्हारा हाथ, मेरा हाथ हो, और हवा में हमारे किस्से बिखरे। देवदार की खुशबू में लिपटा हो वक्त, और हम भूल जाएं, क्या खोया, क्या पाया, घने पेड़ों की छाँव तले, बस एक पल, जो सिर्फ हमारा हो। सीमा असीम 9,8,26
तुम्हारे बिना
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सच कहो कि जीवन क्या है तुम्हारे बिना, धड़कन तो चलती है, पर धड़कने का मजा नहीं। सच कहो कि शामें कैसी हैं तुम्हारे बिना, दिया तो जलता है, पर उजाले का मजा नहीं। सच कहो कि मैं क्या हूँ तुम्हारे बिना, नाम तो मेरा है, पर पहचान का मजा नहीं। तुम हो तो जीवन है, तुम हो तो जहान है, तुम नहीं तो इस जीवन का कोई निशान नहीं। सीमा असीम 8,8,26