"पहाड़ बुला रहे हैं" वो पहाड़, वो वादियाँ बुला रही हमें, कह रही हैं - आओ, थोड़ा साँस तो लो। जहाँ बादल झुक के कानों में कुछ कहें, जहाँ रस्ते भी हमें देख के मुस्कुराएँ। चलो ना, वहीं जहाँ, तुम मैं हो जाएँ, और मैं तुम, वो पहाड़, वो वादियाँ, सच में बुला रही हैं हमें। सीमा असीम 9,8,26
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तुम्हारे बिना
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सच कहो कि जीवन क्या है तुम्हारे बिना, धड़कन तो चलती है, पर धड़कने का मजा नहीं। सच कहो कि शामें कैसी हैं तुम्हारे बिना, दिया तो जलता है, पर उजाले का मजा नहीं। सच कहो कि मैं क्या हूँ तुम्हारे बिना, नाम तो मेरा है, पर पहचान का मजा नहीं। तुम हो तो जीवन है, तुम हो तो जहान है, तुम नहीं तो इस जीवन का कोई निशान नहीं। सीमा असीम 8,8,26
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वो पल जब हाथ हो तेरा मेरे हाथों में, तो लगे जैसे जहाँ थम गया हो साँसों में। न कोई गम, न कोई फिक्र बाकी रहे, बस तू और मैं, और ये लम्हा बाकी रहे। तेरी उँगलियों की गर्मी से दिल धड़कता है, तेरे छूने भर से हर ख्वाब महकता है। बस यही दुआ है उस एक पल के लिए, कि उम्र बीत जाए तेरा हाथ मेरे हाथों में लिए। सीमा असीम
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तुम ही हो मेरे... तुम ही हो मेरे सुबह की पहली रौशनी, तुम ही हो मेरे शाम की आखिरी ख्वाहिश। तुम ही हो मेरे लबों की अधूरी हँसी, तुम ही हो मेरे दिल की पूरी ख़ामोशी। तुम मिलो तो लगता है, सब मिल गया, तुम न हो तो लगता है, कुछ भी नहीं रहा। तुम ही हो मेरे हर ख्वाब का मतलब, तुम ही हो मेरे हर लफ्ज़ का मकसद। तुम हाथ थाम लो तो सफर आसान लगे, तुम साथ चलो तो हर राह में आसमान लगे.. सीमा असीम 8,8,26