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Showing posts from 2025
गुनगुना रहे हैं गीत अकेले ही बैठकर  किसी मूरत के सामने ही बैठकर  कि नदीं उफान पर है आजकल  लहरों को गिन रहे हैं वहीं बैठकर || सीमा असीम  24 ,12,25   नहीं नहीं अब मुझे यह बच्चा नहीं चाहिए कुछ करो कुछ भी करो लेकिन अब मैं इसका पालन पोषण नहीं कर सकती देखभाल नहीं कर सकती तो पैदा क्यों करूं अब मेरा मन तो पूजा पाठ में राम गया है मैंने तो व्रत मन कर लिया है संसार से मेरे बच्चे बड़े हो गए मेरे दो बच्चों की शादी हो गई अब मैं इस उम्र में मैन बनूंगी कैसा लगेगा नहीं मुझे यह बच्चा नहीं चाहिए वह एकदम से चीख पड़ी थी   लेकिन ईश्वर के आगे कभी किसी की चली है भला जो ईश्वर को मंजूर होता है वही होता है जिसको इस दुनिया में भेजना होता है वह किसी तरह से आ ही जाता है किसी की भी कोख से पैदा हो जाता है और जिसको नहीं आना होता है वह कोख में ही खत्म हो जाता है इस दुनिया का मुंह नहीं देख पता ऐसा ही उसके साथ हुआ था  लाख चेतन किए लाख दवाइयां खाई लाख उपाय आजमाए लेकिन इस बच्चे को मेरी कोख में आना है मेरी कोख से ही पैदा होना है तो अब क्या करें वह डॉक्टर के पास गए तुम इस बच्चे को ...

चाह

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 चाहत तो बस इतनी सी है कि जिंदगी में हमारी भरपूर खुशियां ही खुशियां हो   प्राकृतिक वातावरण का माहौल हमारे आसपास हो बहुत सारा प्यार हो और तुम्हारा साथ हो   एक खूबसूरत सा महल जैसा घर हो इसमें हमारा एक नया संसार हो   दर्द का ना हो नाम तो निशान जरा सा भी बस खुशी और सुख की बस बौछार हो   मैं बना लूं खुद को एक बहुत बेहतर इंसान और मेरी आत्मा एकदम पवित्र हो  मेरे चेहरे से झलके मेरी मासूमियत मेरे मन में इतनी ज्यादा पारदर्शिता हो   हमारी सारी चाहते पूरी हो जाए और सारे सपने हो पूरे बस इतनी सी तो ख्वाहिश है  जीवन में वह सब मिल जाए इसके लिए हम हकदार हैं  एक सुंदर सा महल हो सपने जैसा और उसमें हो प्रेम ढेर सारा  अपनों का साथ हो और भरपूर अपनापन हो  बस इतनी सी ही तो चाहत है जैसे भी हो बस पूरी हो जाए  कैसे भी करके इच्छाएं हमारी पूरी हो जाए  क्षितिज के पार जाने की जो चाहत है  आसमान को छूने की जो चाहत है  वह पल भर में पूरी हो जाए  जैसा चाहूं जैसा सोचूँ  बस वैसा होता जाए  अपने आप से सारे रास्ते ...

धैर्य

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 धैर्य एक ऐसा शब्द जो आपको कभी भी निराश नहीं होने देता अगर आप धैर्य का दामन थाम लेते हैं तो आप कभी भी परेशान नहीं हो सकते क्योंकि धैर्य हमें सिखाता है अपने सपनों को जीने का तरीका क्योंकि अगर हम धैर्य के साथ काम करते हैं तो हम अपने सपनों को जीते रहते हैं  अगर हमारे पास सपने नहीं होंगे तो जीवन क्या होगा.. ऐसा जीवन किस काम का होगा.. मेरे ख्याल से जैसे कोई पक्षी होता है तो उसके पंख टूट जाते हैं तो वह आसमान में अपनी ऊंची उड़ान कभी नहीं भर सकता इसलिए जीवन में सपनों का होना बहुत जरूरी है  जब सपने नहीं होते हैं या फिर हम सपनों को छोड़ देते हैं या सपनों को भूल जाते हैं तो जीवन किसी बर्फ के सामान जमा हुआ लगता है जिसमें कोई गरमाहट नहीं  जैसे कोई बंजर सा मैदान बन जाता है जिसमें नहीं उगते कोई फूल.. टूटे हुए पंखों वाला पक्षी कभी आसमान में उड़ा सकता है  नहीं न.. तो हमें अपने सपनों को धैर्य के साथ थामें रहना चाहिए  पकड़े रहना चाहिए तब तक  जब तक है जीवन  जब तक है दुनिया और  जब तक है हम!!!! सीमा असीम सक्सेना  20,12,25

क्यों छोड़ा, क्यों तोड़ा रूह को

 क्या तुम जानते हो या तुम्हें पता है कि  तुमने किस तरह हमारा त्याग कर दिया था  जिस दिन तुम्हारी आत्मा ने मेरी आत्मा को किसी एक दूसरी आत्मा के लिए त्याग किया था  उस दिन काँप उठी थी धरती,नदियों में बाढ़ आ गई थी, धरती घबराकर हिलने लगी थी  क्या तुम्हें पता है जिस दिन तुमने मुझसे प्रेम किया था उसे दिन दुनिया बहुत खूबसूरत हो गई थी  फूलों की  खुशबू से सराबोर  हो गई थी,  मैं मौन थी  चुप थी  खामोश थी  फिर भी हमारा प्रेम बहुत गहरा होता चला जा रहा था  बहुत ही गहरा  मानो हमारी आत्माएं एक दूसरे से बांध गई थी लेकिन  तुमने बंधी हुई दोनों आत्माओं को मेरी और तुम्हारी आत्मा को अलग किया किसी दूसरी आत्मा से रिश्ता जोड़ने के लिए  क्या तुमने कभी सोचा नहीं  क्या तुम्हारे मन में एक ख्याल भी नहीं आया कि  तुमने ऐसा कैसे किया  किसी आत्मा को कष्ट देना  कितना बड़ा पाप है  मेरी रूह तुम्हारे लिए हर समय आवाज लगाती थी  अभी भी आवाज लगाती है  अभी भी तड़प होती है  व्याकुल होकर मैं तुम्हें ढूंढती फिरती हू...

वो वक़्त जो...

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 यूं ही कभी-कभी मन परेशान हो जाता है  ना जाने क्यों इतना बेकरार हुआ जाता है  जुबाँ पर चलता रहता है कोई नाम बार-बार  क्यों यह मेरा दिल तार तार हुआ जाता है..  ऐसा ही होता है ना कभी-कभी, मन पता नहीं क्यों इतना परेशान होता है ना जाने क्यों, पुराने से ख्यालों में खो जाता है और वही सब बातें बार-बार याद करता है जो पल गुजर गए, जो दिन बीत गए, जो वक्त निकल गया उसी वक्त में उस पल में उन्हीं दिनों में मन बार-बार लौट जाने को करता है, पता नहीं क्यों ऐसा होता है अक्सर, मुझे लगता है हर किसी के साथ ही होता होगा गुजरे हुए दिन,पल, वक्त, समय कहां भुलाया जा सकता है किसी से,  कोई भी नहीं भूल पाता है वह बीते हुए, गुजरे हुए जमाने आंखों के सामने गुजरते हैं, बार-बार याद आते हैं वही खूबसूरत हसीन पल और दिन, जब जीवन में बहुत सारी खुशियां थी बहुत सारा प्यार था और बहुत स्नेह अपनापन सब कुछ तो था.  हाथों में हाथ था और नजर के सामने था सब कुछ, वैसे नजरों से ओझल होकर भी तो वो ओझल नहीं हुआ क्योंकि वह कहीं दिल में समा गया है,आंखों में बस गया है और रूह में उतर गया है,..   वह दिन वह पल ...

आलस्य

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 कभी-कभी कुछ करने का बिल्कुल मन ही नहीं करता, न लिखने का मन, न पढ़ने का मन और न ही घर के किसी भी काम को करने का मन..ल गता है मानो पूरे शरीर में आलस्य आ गया है और यह आलस्य कितना अच्छा लगता है, आराम से लेटे रहना, कुछ नहीं करना मतलब कुछ भी नहीं करना लेकिन तभी मुझे याद आते हैं.. अपने बहुत सारे वे कार्य जो अधूरे है और कुछ नए कार्य भी हैं जिन्हें पूरा करना है शुरू करना है.. इसके लिए मुझे इस आलस्य का त्याग करना होगा,छोड़ देना होगा आराम को हालांकि आलस्य इतना आनंददायक होता है कि इससे ज्यादा आनंद तो किसी मनपसंद फिल्म को देखने में भी नहीं आता.. वैसे आराम से बैठकर, लेट कर कल्पनाओं में बिचरना, खुली खुली आँखों से सुंदर-सुंदर सपने देखना, बस यूँ सोचते रहना.. तभी खिड़की से नजर पड़ जाती है सामने खिले हुए फूलों की तरफ,पेड़ों की तरफ, पौधों की तरफ... कितने आनंद के साथ साथ पत्ते हवा के साथ झूम रहे हैं मानो मदमस्त हो गये हैं और यह फूल कितने सुंदर हैं जो अपनी पूरी सुंदरता के साथ मनमोहक खुशबू बिखेर रहे हैं चारों तरफ.. यह तो नहीं आलस करते कभी भी..तभी तो यह झूम रहे हैं मज़े से और सबको खुशियाँ दे रहे हैं.. चलो छ...

बचपना

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 मुझे अच्छा लगता है छोटे-छोटे बच्चों के साथ खेलना उनसे बातें करना और उनकी बातों को सुनना  कितनी प्यारी प्यारी बातें करते हैं छोटे बच्चे और उनके अंदर इतना प्रेम भरा होता है कि आप उन्हें थोड़ा सा भी प्रेम देते हो तो वह उसका 10 गुना प्रेम लौटाते हैं  इसलिए तो मुझे बच्चे बहुत प्यारे लगते हैं क्योंकि उनके अंदर और उनके मन में सिर्फ प्रेम का भाव होता है नफरत की भावना नहीं उनके साथ खेलना उनके साथ दौड़ना भागना वह सब करनाजो छोटे बच्चे करते हैं..  क्या मैं छोटी बच्ची हूं छोटी बच्ची तो नहीं हूं लेकिन मेरा मन छोटे बच्चों जैसा है मैं अपने मन को हमेशा छोटे बच्चे जैसा ही क्यों महसूस करती हूं मैं बड़ी क्यों नहीं होती  मैं देखती हूं लोगों को अपनी उम्र की महिलाओं को कितनी बड़ी-बड़ी बातें करती है कैसे घर गृहस्ती पर बच्चे और न जाने कहाँ कहां की दुनिया भर की बातें.. यह सब बातें मेरे मन में क्यों नहीं आती है अक्सर मैं इसी ख्यालों में रहती हूं यही सब सोचते हैं कि मुझे क्यों नहीं आती दुनियादारी  मैं क्यों अभी भी बचपन में जीती हूं क्यों अपने आप को अभी भी बच्चा समझती हूं ना जाने क्यो...

जंगल

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कभी किसी गहन सुनसान जंगल से गुजरते हुए  अक्सर मेरे मन में एक ख्याल आता है  कि इतना सूनापन सन्नाटा क्यों है इस जंगल में   क्योंकि यहां भी तो रहते हैं जीव जंतु और पक्षी उनकी भी तो आवाज होती है और उनका भी तो कोलाहल फिर क्यों इतना वीरानापन  फिर सोचती हूँ  यह दुनिया जो इंसानों की है वहां इतना शोर शराबा और इतनी आवाज़ है कहीं कोई शांति नहीं कोई सको नहीं सिर्फ शोर आवाज़ और कोलाहल  फिर भी कभी-कभी मुझे महसूस होता है कि इन सबके बाबजूद हर इंसान के अंदर इतना ही गहरा सन्नाटा है  इतना ही सुन्नपन है और इतना ही वीरानापन है  भले ही वह लाख सुख सुविधाओं और खुशियों के बीच क्यों न रह रहा हो है  लेकिन सही बात तो यह है कि हर इंसान के अंदर एक जंगल की तरह ही वीराना है सुनापन है  और सन्नाटा है  सीमा असीम सक्सेना  9,12 25   

ख्वाहिश

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 मैं अपने पंखों को प्रसार कर उस संसार को देखना चाहती हूं जहां खिली खिली धूप हरदम रहती है जहां पर हरियाली अपना बसेरा बसाये है खुला खुला नीला आसमान है और फूल ऐसे चारों तरफ खिले रहते हैं रंग तो इतने खूबसूरत कि देखने का मन करता रहता है मन भरता ही नहीं कभी...  मैं उस खूबसूरत संसार को देखना चाहती हूं जहां पर मैं अपने पर सकूँ के साथ रह सकूं या अपना खूबसूरत सा संसार बसा सकूं.. जहां पर हो प्रेम अपनापन और सिर्फ खुशियां ही खुशियां हो मुस्कुराते हुए मन के साथ अपने मन के अंधेरे को मिटा कर रोशनी से भर लेना चाहती हूं..  बहुत दिन हुए उदासियों के बादलों से घिरे हुए मेरे मन को अब उसे एक खुला आसमान देना चाहती हूं और एक इतनी ऊंची उड़ान भरना चाहती हूँ ताकि उस ताजी हवा को महसूस कर सकूं जी सकूं. जीवन को पूरे आनंद सेभरकर खुश रहूँ और खुशियां भी बाँट सकूं.. उन छोटे-छोटे बच्चों के साथ उनके बच्चों के जैसे ही होकर खिल खिला कर जोर से हंसो और दौड़ लगाऊं इतनी तेज कि उन बच्चों की कुलाची भरती हुई दौड़ को पीछे छोड़ कर आगे निकल जाऊं आगे आगे ही आगे...  बस एक ख्वाहिश तो है और यह ख्वाहिश पूरी होने को है जल...

तेरा नाम

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 क्यों यूँ जो तेरा नाम मेरी जुबाँ पर बार-बार आता है सुबह ओ शाम हर पल हर क्षण जो बार बार आता है  क्या हवाओं से तू पैगाम भेजता रहता है या फिर  फ़िजाओं से तू बात करता रहता है कि  तेरी खुशबू मेरे चारों तरफ बिखर जाती है   लबों पे ही तेरी बात हर बार आती है  मेरे जेहन में तू हर समय भटकता रहता है   क्या अब तुझे कोई और कम नहीं रहता है   मेरा बायां अंग इस तरह से फड़कता है  कि मुझे   मुस्कुराने को मजबूर कर देता है  हिचकियों में कभी आराम नहीं आता है  बस तू यह बता कि मुझे इस तरह से क्यों परेशान करता है  क्या मुझे यादों में हर समय बसाए रखता है   या तू हर वक्त माला में बस मेरा नाम जपा करता है   बता कुछ तो जवाब दे किसी तरह से मुझे  इस तरह से हवाओं से फिजाओं से ना तू  मुझ तक अपनी बात को पहुंचा   बेकरार करके इस तरह क्या तुझे चैन आएगा  मैं तो गुम होकर तेरी याद में   फिर कहीं तुझे ही बावरा ना बन जाऊं... सीमा असीम  6,12, 25

जहाज

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जहाज उतर गया है समुद्र में और भरने लगा है उसमें सामान, जहाज में भरा जा रहा है विदेश भेजने के लिए बहुत सारा सामान यह सामान बेचने वाला जहाज है  जो जाने वाले लोग हैं वह भी जाना चाहते हैं समुद्री जहाज में बैठकर समुद्र की यात्रा करना चाहते हैं दूर देश तक, पानी के ऊपर चलते हुए वह चलते चले जाना चाहते हैं उस देश में जो उनकी कल्पनाओं में है, इसकी उन्होंने कल्पनाएं बचपन से अपने मन में संजो के रखी थी  दूर देश जाना  हवाओं में उड़ जाना या पानी में तैरते हुए पहुंच जाना क्योंकि जीवन को जीने का यही तो तरीका है  अगर हम जीना चाहते हैं तो हमें दूर तक का सोचना पड़ता है दूर तक की कल्पनाओं तक उड़ान भरनी होती है  तो पानी के जहाज हमारी उस कल्पना को पूरी करने के लिए हमें अपने साथ लिए चले जाते हैं दूर देश  इतने प्यारे देश में जहां पर खूब सारी खुशियां होती हैं और खूब सारे सुख होते हैं  एक मस्त परिंदे की तरह मन और ऊंची उड़ान भरने लगता है तो जहाज तैयार है सामान से भी लदें हैं और  इंसान से भी  अपने जहाज में बैठकर जो इंसानों का है दूर देश की यात्रा को निकाल रहे हैं  ...

रंग

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 रंग कितने प्यारे होते हैं जब कभी देखो रंग-बिरंगे कोई चित्र कोई आकृति  तो मन करता है कि बस देखते ही रहो  चाहे वह फूलों के रंग हो या  फिर रंग रंग-बिरंगे रंग कलर  जो हमारे चित्र बना देते हैं सुंदर-सुंदर  तभी इन रंगों को देखकर हमें याद आ जाती है अपने बचपन की  कि हम कैसे खेला करते थे  अपने रंगों से  अपने सुंदर-सुंदर चित्र बनाते थे  अगर हमारे पास सुरंग की नहीं होते थे तो हम मिट्टी लेते थे तो उसको हल्दी में मिलाकर पीला रंग बना लेते थे और  ईंट होती है ना  जो मकान बना देती हैं घर बना देती है  उसे उठाकर हम लाल रंग बनाते थे गेरुआ रंग बनाते थे और जहाँ कहीं भी जगह मिलती  तो उससे हम दीवार पर चित्र बना देते थे जो कहीं खाली दीवार दिखती थी हालांकि मेरी उसे वजह से डांट भी पड़ती थी लेकिन  क्या करें रंगों से प्यार ही इतना है बचपन से लेकर आज तक सच में मुझे रंग बहुत प्यारे लगते हैं  जब बड़े हुए तो हमारे जीवन में कितने सारे रंग आ गए  बचपन में तो प्रेम का रंग होता ही है मां-बाप का प्यार लड़ दुलार सब कुछ लेकिन  जब हम युवा ...
         मुझे अपना तीसरा कहानी संग्रह आप लोगों के हाथों में सौपते हुए बेहद ख़ुशी का अनुभव हो रहा है ! कदम दर कदम चलते हुए ना जाने कैसे यहाँ तक का सफ़र तय कर लिया ! वैसे देखा जाये तो अगर हमारी नीयत साफ़ हो और रास्ता सीधा सच्चा हो तब सफ़र में रहकर भी सफ़र का पता ही नहीं चलता कि हम कितना सफ़र पूरा कर चुके, भले ही हमारे साथ कोई हो या न हो  !  यकीन मानों मेरे प्रिय पाठकों, मैंने अपने बुलंद हौसले के साथ बिन पंखों के सिर्फ एक उडान भर भरी थी, आसमां को छूने की, वैसे जीवन में बस एक उडान ही तो काफी होती है अंतरिक्ष, अनंत आकाश और ब्रह्मांड में बिचरने को, कई कई युगों तक !     इस संग्रह की मेरी हर कहानी या किस्सा को गड़ते हुए मैंने पूरी तरह उसमें डूबकर, उसे अपनी अंतरात्मा में आत्मसात करके, उसी को जीते हुए ढाल दिया है ! जैसे कोई चिड़िया अण्डों पर बैठकर उन्हें सेती है, ठीक वैसे ही मैंने इन कहानियों को जन्मा फिर अपनी ही आलोचनात्मक नजरों से सेते हुए इन्हें कागज पर उकेर दिया ताकि यह अपने पंख पसारकर क्षितिज तक हो आये, घूम आये सारा जहाँ और नभ को छू आये !  ह...

शब्द

 अब अगर ख़ुशी लिखी जाए  तो जरूरी तो नहीं कि  सुख में ही लिखी जाए  उदास चेहरे से या  निराशा में भी तो  ख़ुशी लिखी जा सकती है  ख़ुशी पर कोई कविता  ख़ुशी पर कोई कहानी या फिर  खुशी पर कोई गीत  हां यह अलग बात है कि  खुशी लिखते लिखते  सचमुच ही खुशी आ जाए  सुख जाए और  हताशा भरे पलों में चेहरे पर  प्यारी सी मुस्कुराहट खिल जाए कि  शब्द मात्र शब्द नहीं होते बल्कि  शब्दों के भी वजूद होते है  कहते भी तो हैं न कि शब्द ब्रह्म होते हैं और  यह बात अक्षरसा सत्य है या  फिर सत्य हो जाती है  चाहे शब्द बोले जाए या फिर शब्दों को लिखा जाए  है ना... सीमा 
 दो मैग्गी बनवा लेते हैं ना  तुम भी मैगी तो खाओगे  कितनी शीतल सुंदर तो हवा चल रही है और  इस पहाड़ी इलाके में अगर जाकर पहाड़ी मैगी नहीं खाई तो क्या फायदा  है ना  यार तू ऐसा कर और यह कहते कहते  नयी नवेळी सिंदूर सजी मांग को देखते हुए  माथे पर एक चुम्बन ले लिया वो शरमा गयी फिर मुस्कुराते हुए बोली क्या करते हो सब देख रहे हैं हमें यहाँ पर  यह पहाड़ यह वादियाँ यह घटाएं और... और कौन?  कोई नहीं, अच्छा चलो बताओ मैगी का आर्डर करूँ.. मुझे तो यहाँ पर बहुत अच्छा लग रहा है  सोचता हूँ मैं यहीं पर रह जाऊं  बात को घुमाओ मत, बोलो न, क्या खाना है? एक मैगी और एक भेलपुरी ले लेते हैं  पहाड़ और अपनी मुंबई की चौपाटी को मिक्स अप करके खाएंगे  क्या ही मजा आएगा  इस जन्नत में बैठकर खाने का. दीवानगी भरी नजरों से अपनी नव विवाहिता को देखते हुए कहा... कि अचानक से एक व्यक्ति आया  आते ही उसने एक सवाल दागा  सुनो कौन हो तुम  हिंदू या मुसलमान  हम हिंदुस्तान में रहते हैं  तो हिंदू हैं यह गर्व से कहते हैं  अच्छा तो तुम गोली ख...

कविता

 जब हम प्रेम को जी रहे होते हैं  तब हम प्रेम को लिख नहीं पाते हैं  और जब हम प्रेम को लिख रहे होते हैं  तब हम प्रेम को जी नहीं पाते कि  हम जिए हुए प्रेम को लिख सकते हैं  पर जब हम प्रेम में होते हैं  तो प्रेम को चाह कर भी नहीं लिख पाते.. सीमा 

कविता

 दुःख आपको तोड़ देते हैं  कहते हैं अक्सर यही सब लोग  नहीं ऐसा नहीं है  मेरा मानना है कि  दुख आपको जोड़ते हैं  खुद से  अपनों से  और ईश्वर से  सीमा 
 यूं ही अचानक  जब किसी से आपको मिलने को  बात करने को  दिल मचलने लगे  तो यकीनन वह भी आपको  ऐसे ही याद कर रहा होगा  ऐसे ही मिलने को  बात करने को  तङप रहा होगा  क्योंकि कहते भी है ना  दिल से दिल को राह होती है  और जब तार आत्मा की गहराई से जुड़े हो  तब तो यही सच होता है  तेरे बिना जिया जाये न.... सीमा 
 आज पूरा दिन घर में बैठे-बैठे मन बहुत उदास हो रहा था बच्चे भी सब चले गए दोनों बेटियां अपनी ससुराल और बेटा नौकरी पर आज चार दिनों से गया हुआ है मन नहीं लग रहा है घर में हालांकि आज तो शादी में भी जाना है इंजॉय करना है खूब सारे मेकअप लगा के नए-नए कपड़े पहन कर वहां पर सबसे मिलना जुलना होगा लेकिन चलो थोड़ी देर घूम आते हैं ऐसे चेहरे पर अलग सा गला आ जाएगा जो उदासी दिनभर घर में पड़े पड़े हो गई है ना वह काम हो जाएगी तो जब गला आएगा ना चेहरे पर बाहर निकाल कर टहल के आने के बाद उसे पर मेकअप किया जाएगा तो अलग ही सुंदरता दिखेगी ऐसा ही सोच कर वह अपने पति से होली चलो ना कहीं घूमता आते हैं थोड़ी देर कहां चलोगे अभी 1 घंटे बाद तो तैयार होकर शादी के लिए निकलना है कहां अभी कहां अभी तो 5:00 है और हम लोग 9:00 बजे से पहले कहां शादी में जाएंगे यह तो है लेकिन मेरा मन नहीं है तुम जाना चाहो तो तुम चली जाओ चलो अच्छा फिर मैं ही होकर आता हूं अक्सर अकेले ही तो चली जाती थी कभी ऐसा तो नहीं है इस साथ में ही जाना होता था और अक्सर अकेले निकल गई घूमने के लिए थोड़ी दूर खुली हवा में सांस ले आई बंद घर में घुटन भी तो हो जाती...

असीम दुःख दर्द

 मुझे बस इतना पता है कि तुम किसी बात की परवाह नहीं करते हो, ना किसी से डरते हो, खुद गलत होते हुए भी खुद को हमेशा सही कहते हो, ना जाने क्यों किस लिए और आखिर किस वजह से, जो शहनशाही अपने लिए मन में पाल रखी है कि जो तुम हो वही सही है या जो कुछ भी तुम करते हो बस वही सही है या फिर जो कुछ भी तुमने किया बस वही सही है लेकिन तुम्हें एक बात बताऊं ऐसा नहीं होता है, खुद से भी बढ़कर एक शक्ति है जो सब कुछ देखती है, सब कुछ जानती है और सब कुछ समझती है, वह अभी सजा नहीं आपको दे रही है लेकिन समय आने पर उस सजा को तुम्हें भुगतना पड़ेगा, उस अंजाम को तुम्हें हर हाल में सहना पड़ेगा, जीना पड़ेगा तड़प तड़प कर, तुम्हें इस तरह से जैसे वह तुम्हें जीने की परमिशन देगा, इजाजत देगा सिर्फ वही तुम्हें करना होगा, तब तुम्हारी इच्छा से कुछ नहीं होगा या तुम्हारी मानने से, समझने से भी कुछ नहीं होगा, होगा वही जो कि वह सत्ता चाहती है, जो अलौकिक है अद्भुत है अचंभित कर देने वाली है और मेरा यकीन है कि वह सत्ता है और वह आज नहीं तो वक्त आने पर तुम्हें उसे अंजाम तक जरूर पहुंचाएगी जिस अंजाम के तुम हकदार हो या तुमने जो कुछ भी किया है...

प्रेम

 प्रेम के लिए लोगों ने  न जाने किया महल बनाये  दुमहल बनाये और दुनिया में अजूबे भी बनाकर खड़े कर दिए  लेकिन तुमने क्या किया  डुबा दिया मुझे इस कदर कि  उबरने का नाम ही नहीं है  बताओ कोई प्रेम को सर का ताज बना लेता है  और तुम जैसा कोई  प्रेम को गर्त में डुबा देता है  शायद तुम स्वार्थ के वश में  न जाने क्या क्या करते रहे  खुद को ही खुदा समझते रहे  कभी सोचा ही नहीं मेरे बारे में  दिया ही नहीं वो सम्मान  जिसकी मैं हकदार थी  अब क्या ही कहूँ और कितना कहूँ  कोई फर्क तो पड़ेगा नहीं न  तुम क्या जानोगे प्रेम की  ऊंचाइयों क्या होती हैं  कैसे प्रेम को निभा लिया जाता है  हर गलती को माफ़ कर गले से लगा लिया जाता है  काश कि आये तुम्हें सद्बुद्धि  थोड़ी ही सही  आये और मुझे समझ पाओ  साथ ही प्रेम को भी.... सीमा असीम  2,3,25

प्रेम और घृणा

 घृणा और प्रेम का एक ऐसा नाता है  जिसे एक दूसरे से कभी अलग किया ही नहीं जा सकता  जहां प्रेम है वहाँ घृणा है और  जहाँ घृणा है वहां प्रेम है  प्रेम के अंदर घृणा घुसी हुई है और घृणा के अंदर प्रेम हम जिसे प्रेम करते हैं  उसी से हम घृणा भी करते हैं और  जिसे घृणा करते हैं  उसी से हम प्रेम करते हैं  अधाह प्रेम करते हैं और  अधाह घृणा भी  न जाने क्यों ऐसा है? लेकिन यही सच है  तभी तो मैं तुम्हें जितना प्रेम करती हूं  उतनी ही तुमसे घृणा करती हूं और  जितनी मैं तुमसे घृणा करती हूं  उससे कई कई गुना ज्यादा मैं  तुमसे प्रेम करती हूं  यही सच है और  यह सच कभी खत्म नहीं हो सकता  हमेशा रहेगा  प्रेम और घृणा का संबंध यूं ही... सीमा असीम  1,3,25

तुम

 तुम जब आँखों को बंद करते होंगे  नज़र तो सिर्फमैं ही आती होऊंगी  खोलकर आँखों को भी नज़र से  तुम्हारी दूर कहाँ होती होऊंगी  करते होंगे तुम चाहें जितना जतन  पलभर को भी न निजात मिलती होंगी  कहो तो मैं तुम्हें न याद करूँ  पर यह बात न मुझसे होंगी  कि भूलने को तुम्हें मैं याद न करूँ  अब तो यह आदत है मेरी और तुम्हारी भी  कि न तुम मुझे दूर कर पाते हो  न ही मैं भुला पाती हूँ  अजीब सी कोई दास्तां बन रही है  कि गुल कोई कमाल का खिलेगा  यादों को बना कर ताबीज सा  जो पहना दिया है तुमने  उसमें अब तुम ही बंध गये हो  चाह कर भी नहीं मिलेगी मुक्ति  और भी ज्यादा जकड़ गये हो  बस यही तो है सच और सच्चाई भी न..... सीमा असीम  28,2,24

याद

 न जाने कितनी राते हैं मेरी  तुम्हें याद करते हुए गुजर जाती है  जानती हूं कि तुम मेरे हो और सिर्फ मेरे ही हो  क्योंकि मन जिसके पास है बस वही तो उसका अपना है  मेरा मन हमेशा तुम्हारे पास है और  तुम्हारा मेरे पास  ऐसा हो ही नहीं सकता कि  मेरा मन तुम्हारे पास लगा रहे और  तुम्हारा मेरी तरफ ध्यान ही ना जाए  कितना घबराहट होती है  दिन भर में कितनी ही बार  जाकर तुम्हें देख लेती हूं और  फिर मन को समझ लेती हूं  कभी दो बूंद आंखों से छलका लेती हूं और  अपनी आंखों की जलन को मिटा लेती हूं  अक्सर ऐसा होता है कि पल भर को  भूलने की कोशिश करती हूं पर  मेरी कोशिश हमेशा नाकाम हो जाती है और  तुम्हारी याद मेरे मनमस्तिष्क पर कब्जा जमा लेती है और   तुम्हें, मेरा और मुझे तुम्हारा बनाए रखती है  यूँ ही सदा  या जन्मों जन्मान्तरों के लिए... सीमा असीम  27,2,25

तुम ही तो

 सुनो कि मैं तुम्हें याद करती हूँ  कि अटक से गए हो मेरे हृदय में  एक आवाज एक पुकार आती है और  अंतर मन से टकराकर मस्तिष्क में गूंजती हुई फिर  वापस हृदय में समा जाती है  मैं तुम्हें देखती हूं ख्वाबों में   अपने अदृश्य मन से  ख्वाबों भरी आंखों से  हर वक्त अपने आस-पास मैं महसूस करती हूं तुम्हें  बिल्कुल अपने करीब और  मैं तुम्हें सुनती हूं तुम्हारी आवाज को  जो गूंजती है ब्रह्मांड में  सिर्फ तुम्हें ही तो  तुम्हारे सिवा और किसी को  कहाँ याद करती हूं और  मैं किसका नाम लेती हूं और  मैं किसे पुकारती हूँ  सिर्फ तुम ही तो हो  जो बसे हो  मेरे हृदय में  मेरे अंतर मन में  और  मेरी आत्मा में  तुम ही  सिर्फ तुम ही  सीमा असीम 

प्रेम

 शायद हम प्रेम भी आजकल  व्यापार की तरह करने लगे हैं  वीकेंड मनाते हैं  डेट पर जाते हैं  वैलेंटाइन डे मनाते हैं  वेलेंटाइन वीक भी मनाते हैं  टेडी डे  चॉकलेट डे कितनी ही तरह के डे हम मनाते हैं लेकिन  क्या हम सच में दिल से प्रेम निभा पाते हैं  क्या प्रेम सिर्फ चॉकलेट देने से  टैडी देने से हो जाता है  या गले लगाने से  चुम लेने से प्रेम होता है  या फिर हम किसी से वादा कर देते हैं  तो क्या उससे भी प्रेम हो जाता है  शायद हम प्रेम को समझ ही नहीं पाते  शायद हमने प्रेम को कभी समझ ही नहीं  तभी तो हम देने लेने में इतना खो जाते हैं कि प्रेम की गरिमा को भूल जाते हैं  प्रेम क्या है  कैसे हैं  क्यों होता है  नहीं जानते हैं  अगर हम जानते तो हम गहराई में उतर जाते और  उसे अपने अंतर मन से निभाते  जन्म जन्म तक  क्योंकि प्रेम एक जन्म के लिए नहीं होता  प्रेम तो एक ऐसी भावना है अगर  आपके मन में घर कर जाए तो  वह कभी खत्म ही नहीं होती और  अगर खत्म हो जाए तो  श...

असीम अनंत

 प्रेम को लिखना इतना आसान नहीं होता है  प्रेम को करना भी इतना आसान नहीं होता है  प्रेम एक ऐसी चीज है जिसे आप जितना करोगे या  इसमें जितना डुबोगे और डूबते ही चले जाओगे और  जितना ऊबरोगे उतना ही उभरते चले जाओगे  प्रेम में सिर्फ डूबना ही नहीं होता  प्रेम में उबरना भी होता है कि  अगर प्रेम में डूब कर न उबरे तो  वह प्रेम ही नहीं और  जो ऊबर के फिर से प्रेम में न डू बे तो  प्रेम ही नहीं  प्रेम डूबने और उभरने का ही तो एक खेल है बस   प्रेम बस एक खेल ही है जो मन से संचालित होता है और  मन तक जाता है  कि जब साथ रहो तो प्रेम होता है असीम और  जब दूर हो जाओ तो अनंत हो जाए  सच में प्रेम की माया अनोखी है  अलग है  न्यारी है  इसे कोई नहीं समझ सकता  ना तुम ना हम  बस असीम और अनंत के रंग है प्रेम में... सीमा असीम  8,2,25
 सुनीता जी भजन में तालीम होने के बाद उठी आहत हो गई थी आ गए हैं इतने सालों से सॉन्ग में रहते हुए शायद भी आहट सी पहचान जाती थी पानी का गिलास लेकर सामने आकर खड़ी होगी और उनको इस हालत में देखकर बोली अरे क्या हो गया आपको तबीयत खराब है और इतनी देर कैसे हो गई मैं थोड़ी घबराहट भर कर में बोले अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है तबीयत नहीं खराब है बस काम का थोड़ा वर्क लोड ज्यादा था इस वजह से देर भी हो गई और तक भी गया हूं बहुत थोड़ा रेस्ट करना चाहता हूं अब आपकी तबीयत सही नहीं रहती है बच्चे भी मना करते हैं छोड़ दो हम नौकरी इतने सालों तक कर लिया ना अब बच्चे भी अब सेटल हो ही गई है और मुझे भी ज्यादा किसी चीज की जरूरत नहीं है जो है उसी में गुजर कर लेंगे मुझे अपना ख्याल रखो और जल्दी से सही हो जाओ अरे क्या बात लेकर बैठ गई जब तक हाथ पर चल रहे हैं तब तक तो काम करना ही चाहिए ना वैसे भी अभी मेरी नौकरी के पूरे 6 साल बचे हुए हैं घर में रहकर भी क्या करूंगा कभी-कभी हो जाता है रोज तो लेना चलो ठीक है तुम चाय बना कर लो मैं मुंह धो कर आता हूं चाय पियेंगे फिर मैं आराम करूंगा अतुल थोड़ा सा नॉर्मल होते हुए बोला करना वह समझा ...

जन्मदिन का उपहार

 बाल कहानी  जन्मदिन का उपहार  --------======------- आज बहुत प्यारी हनी मधुमक्खी जी का जन्मदिन है, सब लोग बहुत खुश हो रहे हैं और सोच रहे हैं कि शेर राजा हर किसी को उसके जन्मदिन पर कुछ ना कुछ उपहार देते हैं इस बार वह हनी मधुमक्खी जी को क्या उपहार देंगे?  जंगल के सभी वासी यही सब विचार विमर्श कर रहे थे कि राजा शेर जी आये और उन्होंने मधुमक्खी जी से पूछा, तुम हमारे राज्य की सबसे प्यारी और छोटी सदस्य हो और हम चाहते हैं कि तुम्हारे लिए हम कोई स्पेशल उपहार दें क्योंकि तुम हमारे लिए बहुत प्यारा मीठा शहद भी तो बनाती हो! हाँ मीठा मीठा शहद हनी मधुमक्खी ही बनाती है! एकदम से भालू दादा जी बीच में टपक पड़े! भालू जी की यह बात सुनकर सब जोर-जोर से हंसने लगे, खूब मस्ती मजाक का माहौल चल रहा था जन्मदिन था तो सबको मजा भी आ रहा था कि आज तो बढ़िया-बढ़िया चीज खाने को मिलेगी, शेर राजा केक भी मंगाएंगे और सब मिलकर केक काटेंगे, उसके बाद में खाना पीना पार्टी सब मजे करेंगे और आखिर में शेर राजा पिक्चर भी तो दिखाते हैं, जंगल की बड़ी सी स्क्रीन पर,जो उन्होंने अभी-अभी शहर से मंगवा कर लगवाई है! वैसे जब स...