प्रेम

 शायद हम प्रेम भी आजकल 

व्यापार की तरह करने लगे हैं 

वीकेंड मनाते हैं 

डेट पर जाते हैं 

वैलेंटाइन डे मनाते हैं 

वेलेंटाइन वीक भी मनाते हैं 

टेडी डे 

चॉकलेट डे

कितनी ही तरह के डे हम मनाते हैं लेकिन 

क्या हम सच में दिल से प्रेम निभा पाते हैं

 क्या प्रेम सिर्फ चॉकलेट देने से 

टैडी देने से हो जाता है 

या गले लगाने से

 चुम लेने से प्रेम होता है 

या फिर हम किसी से वादा कर देते हैं 

तो क्या उससे भी प्रेम हो जाता है 

शायद हम प्रेम को समझ ही नहीं पाते

 शायद हमने प्रेम को कभी समझ ही नहीं 

तभी तो हम देने लेने में इतना खो जाते हैं कि प्रेम की गरिमा को भूल जाते हैं 

प्रेम क्या है 

कैसे हैं 

क्यों होता है 

नहीं जानते हैं 

अगर हम जानते तो हम गहराई में उतर जाते और 

उसे अपने अंतर मन से निभाते 

जन्म जन्म तक 

क्योंकि प्रेम एक जन्म के लिए नहीं होता

 प्रेम तो एक ऐसी भावना है अगर

 आपके मन में घर कर जाए तो 

वह कभी खत्म ही नहीं होती और

 अगर खत्म हो जाए तो 

शायद वह प्रेम था ही नहीं 

कभी था ही नहीं उसे हम प्रेम कह ही नहीं सकते 

क्योंकि प्रेम अमर है असीम है, शाश्वत है और अनंत  है..



सीमा असीम 

11,2,25



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