असीम अनंत

 प्रेम को लिखना इतना आसान नहीं होता है

 प्रेम को करना भी इतना आसान नहीं होता है

 प्रेम एक ऐसी चीज है जिसे आप जितना करोगे या 

इसमें जितना डुबोगे और डूबते ही चले जाओगे और 

जितना ऊबरोगे उतना ही उभरते चले जाओगे

 प्रेम में सिर्फ डूबना ही नहीं होता 

प्रेम में उबरना भी होता है कि 

अगर प्रेम में डूब कर न उबरे तो 

वह प्रेम ही नहीं और 

जो ऊबर के फिर से प्रेम में न डू बे तो 

प्रेम ही नहीं

 प्रेम डूबने और उभरने का ही तो एक खेल है बस 

 प्रेम बस एक खेल ही है जो मन से संचालित होता है और 

मन तक जाता है

 कि जब साथ रहो तो प्रेम होता है असीम और

 जब दूर हो जाओ तो अनंत हो जाए

 सच में प्रेम की माया अनोखी है 

अलग है 

न्यारी है 

इसे कोई नहीं समझ सकता

 ना तुम ना हम

 बस असीम और अनंत के रंग है प्रेम में...

सीमा असीम 

8,2,25

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