कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
न जाने कितनी राते हैं मेरी तुम्हें याद करते हुए गुजर जाती है जानती हूं कि तुम मेरे हो और सिर्फ मेरे ही हो क्योंकि मन जिसके पास है बस वही तो उसका अपना है मेरा मन हमेशा तुम्हारे पास है और तुम्हारा मेरे पास ऐसा हो ही नहीं सकता कि मेरा मन तुम्हारे पास लगा रहे और तुम्हारा मेरी तरफ ध्यान ही ना जाए कितना घबराहट होती है दिन भर में कितनी ही बार जाकर तुम्हें देख लेती हूं और फिर मन को समझ लेती हूं कभी दो बूंद आंखों से छलका लेती हूं और अपनी आंखों की जलन को मिटा लेती हूं अक्सर ऐसा होता है कि पल भर को भूलने की कोशिश करती हूं पर मेरी कोशिश हमेशा नाकाम हो जाती है और तुम्हारी याद मेरे मनमस्तिष्क पर कब्जा जमा लेती है और तुम्हें, मेरा और मुझे तुम्हारा बनाए रखती है यूँ ही सदा या जन्मों जन्मान्तरों के लिए... सीमा असीम 27,2,25
सुबह सबेरे हाथ में छोटा सा थैला पकडे धीरे धीरे चली आती है अब जिस्म में उतनी जान नहीं है फिर भी वे अपनी गाडी खींचती रहती हैं बड़ी सफाई से बर्तन धोती है पोंचा बैठ कर लगता नहीं है
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