रंग

 रंग कितने प्यारे होते हैं जब कभी देखो रंग-बिरंगे कोई चित्र कोई आकृति

 तो मन करता है कि बस देखते ही रहो 

चाहे वह फूलों के रंग हो या

 फिर रंग रंग-बिरंगे रंग कलर 

जो हमारे चित्र बना देते हैं सुंदर-सुंदर

 तभी इन रंगों को देखकर हमें याद आ जाती है अपने बचपन की 

कि हम कैसे खेला करते थे

 अपने रंगों से

 अपने सुंदर-सुंदर चित्र बनाते थे 

अगर हमारे पास सुरंग की नहीं होते थे तो हम मिट्टी लेते थे तो उसको हल्दी में मिलाकर पीला रंग बना लेते थे और 

ईंट होती है ना

 जो मकान बना देती हैं

घर बना देती है 

उसे उठाकर हम लाल रंग बनाते थे गेरुआ रंग बनाते थे और

जहाँ कहीं भी जगह मिलती 

तो उससे हम दीवार पर चित्र बना देते थे जो कहीं खाली दीवार दिखती थी हालांकि मेरी उसे वजह से डांट भी पड़ती थी लेकिन 

क्या करें रंगों से प्यार ही इतना है बचपन से लेकर आज तक

सच में मुझे रंग बहुत प्यारे लगते हैं 

जब बड़े हुए तो हमारे जीवन में कितने सारे रंग आ गए 

बचपन में तो प्रेम का रंग होता ही है मां-बाप का प्यार लड़ दुलार सब कुछ लेकिन 

जब हम युवा हुए तो हमारे पास एक रंग और आ गया वो था मोहब्बत का रंग 

अपने किसी प्रिय के साथ उसे मोहब्बत के रंग को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का 

एक जुनून जाजवा जो लगता था कि कितनी खूबसूरत है यह दुनिया 

कितने प्यारे प्यारे रंग है इस दुनिया के 

तब समझ में आया कि रंग वाकई रंग होते हैं

जो रंग हमें हवा में नहीं उड़ाते बल्कि हमें जमीन से जोड़ते हैं क्योंकि मैं बचपन से सीखा था मिट्टी से रंग बनाना ईंट रंग बनाना और फूलों से रंग बनाना

 रंग सच में बहुत प्यारे होते हैं रंग-बिरंगे मन को को मोह लेने वाले रंग...

सीमा असीम ❤️

4,12,25


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