क्यों छोड़ा, क्यों तोड़ा रूह को
क्या तुम जानते हो या तुम्हें पता है कि
तुमने किस तरह हमारा त्याग कर दिया था
जिस दिन तुम्हारी आत्मा ने मेरी आत्मा को किसी एक दूसरी आत्मा के लिए त्याग किया था
उस दिन काँप उठी थी धरती,नदियों में बाढ़ आ गई थी, धरती घबराकर हिलने लगी थी
क्या तुम्हें पता है जिस दिन तुमने मुझसे प्रेम किया था उसे दिन दुनिया बहुत खूबसूरत हो गई थी
फूलों की खुशबू से सराबोर हो गई थी,
मैं मौन थी
चुप थी
खामोश थी
फिर भी हमारा प्रेम बहुत गहरा होता चला जा रहा था
बहुत ही गहरा
मानो हमारी आत्माएं एक दूसरे से बांध गई थी लेकिन
तुमने बंधी हुई दोनों आत्माओं को मेरी और तुम्हारी आत्मा को अलग किया किसी दूसरी आत्मा से रिश्ता जोड़ने के लिए
क्या तुमने कभी सोचा नहीं
क्या तुम्हारे मन में एक ख्याल भी नहीं आया कि
तुमने ऐसा कैसे किया
किसी आत्मा को कष्ट देना
कितना बड़ा पाप है
मेरी रूह तुम्हारे लिए हर समय आवाज लगाती थी
अभी भी आवाज लगाती है
अभी भी तड़प होती है
व्याकुल होकर मैं तुम्हें ढूंढती फिरती हूं
बेचैन होती हूं
एक पल को भी तुम्हें खुद से दूर नहीं करती हूं
हर समय अपने आसपास कल्पनाओं में बसाए रखती हूँ
लेकिन तुमने क्या किया मेरी आत्मा के साथ
क्या किया आंसुओं की नदी बहती थी
जितना मैं रोती थी उससे भी ज्यादा मेरी आत्मा रोती थी और
\धरती पुरी पानी पानी हो गई थी
क्या तुम्हें एहसास नहीं हुआ
क्या तुम्हें समझ में नहीं आया
कैसे नहीं आया
क्यों नहीं आया
समझ ही नहीं आता कि
तुमने कैसे किया यह सब
कैसे तुमने मेरे मन को घायल कर दिया
तन को घायल कर दिया और
क्या-क्या नहीं किया दिल रोज रोता है उन दोनों को बातों को याद करके मेरा
हालांकि तुम किसी और दूसरे का नाम लेते होंगे अपनी जुबान से लेकिन
तब भी तुम्हारे मन से मेरा ही नाम निकलता होगा
मेरी आत्मा का दर्द तुमने कैसे नहीं समझा
क्या तुम्हें अभी भी नहीं एहसास होता कि
तुम मेरे जो बहे हुए आंसू
जो चेहरे पर जम गए हैं काले काले से निशान बनाकर
उन्हें जाकर पूछ सको या मेरी नस-नस में दर्द की जो लहर उठी है उसे आकर
एक मिनट एक बार सहलाकर दूर कर दो या मेरे चेहरे पर वही पवित्र मुस्कान बिखेर दो
जो पहले बिखरी रहती थी
जो अभी सिर्फ उदासी में बदल गई है
मिटा दो इस उदासी के नाम निशान को
खुशियों की बाढ़ ला दो
सीमा असीम
१९,12,25
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