वो वक़्त जो...

 यूं ही कभी-कभी मन परेशान हो जाता है

 ना जाने क्यों इतना बेकरार हुआ जाता है 

जुबाँ पर चलता रहता है कोई नाम बार-बार 

क्यों यह मेरा दिल तार तार हुआ जाता है..

 ऐसा ही होता है ना कभी-कभी, मन पता नहीं क्यों इतना परेशान होता है ना जाने क्यों, पुराने से ख्यालों में खो जाता है और वही सब बातें बार-बार याद करता है जो पल गुजर गए, जो दिन बीत गए, जो वक्त निकल गया उसी वक्त में उस पल में उन्हीं दिनों में मन बार-बार लौट जाने को करता है, पता नहीं क्यों ऐसा होता है अक्सर, मुझे लगता है हर किसी के साथ ही होता होगा गुजरे हुए दिन,पल, वक्त, समय कहां भुलाया जा सकता है किसी से, 

कोई भी नहीं भूल पाता है वह बीते हुए, गुजरे हुए जमाने आंखों के सामने गुजरते हैं, बार-बार याद आते हैं वही खूबसूरत हसीन पल और दिन, जब जीवन में बहुत सारी खुशियां थी बहुत सारा प्यार था और बहुत स्नेह अपनापन सब कुछ तो था.

 हाथों में हाथ था और नजर के सामने था सब कुछ, वैसे नजरों से ओझल होकर भी तो वो ओझल नहीं हुआ क्योंकि वह कहीं दिल में समा गया है,आंखों में बस गया है और रूह में उतर गया है,..

  वह दिन वह पल वह समय वह वक्त जो गुजर गया है वह कहीं गुजरकर भी गुजारा नहीं है है हमारे ही साथ है, हमारे ही पास है हरदम आसपास है...

 सीमा असीम 

18,12,25


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