चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।कबीर दास जी कहते हैं कि इस झूठे और नश्वर संसार में जो इंसान अपने स्वार्थ के लिए जीते हैं वे सिर्फ अपना भला चाहते हैं इसलिए भगवान भगवान करते रहते हैं लेकिन उनके मन में छल कपट भरा रहता है वे दूसरों को नीचा दिखाते हैं उनका अपमान करते हैं और उनके स्नेह का लाभ उठाकर उन्हें या तो बर्बाद कर देते हैं या उनका सब कुछ छीन लेते हैं सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए ही वो सब कुछ करते हैं लेकिन जो इंसान सच्चे भाव से ईश्वर को मानते हैं वे कभी भी झूठा या दिखावा नहीं करेंगे कि हाथ में मोतियों की माला ले ले और उसे फेरते रहें बल्कि अपने सच्चे मन से अपनी आत्मा से उसके लिए अच्छा करेंगे उसका भला करेंगे ,,,,और मन ही मन उसका जाप करेंगे ......बोलना कहना यह सब झूठ होते हैं मन से किया जाने वाला काम हमेशा सही और सच्चा होता है ....सीमा असीम 23,3,20
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पहाड़
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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