झिरमिर- झिरमिर बरसिया, पाहन ऊपर मेंह।माटी गलि सैजल भई, पांहन बोही तेह॥





कितना सही कहा है कि पत्थर के ऊपर कितना भी पानी बरसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि पानी के बरसने से मिट्टी तो बीग कर गीली हो गयी किन्तु जो पत्थर था वो वैसे का वैसा ही रहा ! इसी प्रकार इंसान भी है अगर कोई सच्चा और कोमल मन का है वो बहुत जल्दी पसीज जाता है किन्तु एक सख्त इंसान कभी भी नहीं पिघलेगा चाहे लाख कोशिश कर लो !!सीमा असीम 14,3,20 x

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