पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात।एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात।
कबीर जी का कथन कितना सही है कि हमारा यह शरीर नश्वर है इस पर गर्व अहंकार या घमंड कियारना व्यर्थ  है ! रावण ने भी बहुत घमंड किया था , बहुत अहंकार था उसे कि मैं दुनिया में सबसे बड़ा ज्ञानी हूँ मेरा पास सोने की लंका है मुझे कोई नहीं हरा सकता है, कोई नहीं मार सकता है ,,मैं अमर हूँ लेकिन उसका घमंड  ही उसे ले डूबा ,तो हे मानुष तुझे किस बात का घमंड है क्या इस शरीर पर ,,? यह शरीर पानी के बुलबुले के समान है ठीक उसी तरह से जैसे सुबह होते ही तारे आसमान में कहीं छुप जाते हैं ....सीमा असीम, 24,3,20 




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