माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

वो कहते हैं न कि अगर हमारा मन साफ नहीं है, पवित्र नहीं है और बाहर से कुछ कहते हैं और अंदर से कुछ और बोलते हैं ऐसे लोग भगवान को कितना भी मनाए वे नहीं सुनते न ही ध्यान देते हैं लेकिन जिंका मन स्वच्छ है बेकार की बातों और दिखबे से दूर है उसे भगवान से कहने की भी जरूरत नहीं होती वे खुद बख़ुद हमारी बातें सुन लेते हैं और हमसे तारतमय स्थापित कर लेते हैं इसलिए उनको ज़ोर बुलाने पुकारने या रटने की जरूरत नहीं है सिर्फ सच्चे मन से स्मरण करते रहो जपते रहो फिर देखना तुम्हारी सब समस्याओं का हल निकाल आएगा ....
सीमा असीम 4,3,20 

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