धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,

माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।
रे मन तू इतना धीरज रख कि दुनिया खत्म हो जाये पर तेरा धैर्य कम न हो और तू अपने सत्कर्म करता जा अगर कोई गलत है गलत कर रहा है तो यह उसकी ही समस्या है उसकी ही गलती है करने दो उसे जो चाहे करना हो करने दो  तेरे कर्म हमेशा तेरे साथ हैं और समय आने पर तुझे तेरे कर्मों का फल मिल जायेगा ... जरूर मिलेगा और खुशियाँ अपना दामन फैलाये तेरे आस पास बिखर जायेंगी ,, ओ मेरे मन तू अपने सत्कर्म करता रह और फल जरूर मिल जाएगा ...सुनो मैं जब निःशब्द हो जाती हूँ न तब बहुत बोल रही होती हूँ ...क्या तुम सुन रहे हो और साथ साथ बोल भी रहे हो न 

सीमा असीम 
2,3,20 

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