लंबा मारग दूरि घर, बिकट पंथ बहु मार।कहौ संतों क्यूं पाइए, दुर्लभ हरि दीदार॥कबीर दास जी कहते हैं कि घर बहुत दूर है और रास्ता बहुत कठिन, साथ ही इस रास्ते में अनेक प्रकार के चोर और ठग हैं जो हमें हमेशा ठगते रहते हैं हमारा नुकसान करते हैं तकलीफ देते है और स्वयं को फिर भी सही बताते रहते हैं तो बताओ ऐसे लोगों को ईश्वर के दर्शन कैसे हो ? क्योंकि संसार में कठिन जीवन के साथ अनेक बाधाएँ हैं विपत्तियाँ हैं ,, और हम उनमें ही पड़े रहते और भ्रमित होते रहते हैं ,,अनेकों आकर्षण हमें अपनी ओर खींचते रहते हैं जिस कारण हम अपने लक्ष्य को भूल जाते हैं और अपनी पूंजी को गवां देते हैं ....सीमा असीम 31,2,20 
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