माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।कबीर दास जी कहते हैं कि इस झूठे और नश्वर संसार में जो इंसान अपने स्वार्थ के लिए जीते हैं वे सिर्फ अपना भला चाहते हैं इसलिए भगवान भगवान करते रहते हैं लेकिन उनके मन में छल कपट भरा रहता है वे दूसरों को नीचा दिखाते हैं उनका अपमान करते हैं और उनके स्नेह का लाभ उठाकर उन्हें या तो बर्बाद कर देते हैं या उनका सब कुछ छीन लेते हैं सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए ही वो सब कुछ करते हैं लेकिन जो इंसान सच्चे भाव से ईश्वर को मानते हैं वे कभी भी झूठा या दिखावा नहीं करेंगे कि हाथ में मोतियों की माला ले ले और उसे फेरते रहें बल्कि अपने सच्चे मन से अपनी आत्मा से उसके लिए अच्छा करेंगे उसका भला करेंगे ,,,,और मन ही मन उसका जाप करेंगे ......बोलना कहना यह सब झूठ होते हैं मन से किया जाने वाला काम हमेशा सही और सच्चा होता है ....सीमा असीम 23,3,20 
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