कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस।ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस।

कितना सही कहा है कबीर जी ने कि  हे मूर्ख मनुष्य तू किस बात पर इतना इतराता है गर्व करता है न जाने क्या सोचता है किस बात का अहंकार पाल रखा है क्या तुझे पता भी है कि तेरा यह जिस्म जिसे तूने बड़े नखरे से पाला है और इस पर इतना नाज करता है लेकिन तुझे यह बात नहीं पता है तेरे जिस्म पर जो सर है न उस पर जो खूबसूरत बाल हैं वे काल के हाथों में फंसे हुए हैं और वो तुझे कब कहाँ अपने साथ ले जाये या मार डाले चाहें वो अपना देश हो या परदेश हो ,तुझे बिलकुल पता भी नहीं चलेगा .....इसलिए घमंड करना छोड़ दे ....सीमा असीम  20,3,20 

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