लाली मेरे लाल की जित देखूं तित लाल,
लाली देखन मैं गयी मैं भी हो गयी लाल
सच कहूँ तो सच यही है कि मैं जिधर देखती हूँ उधर तुम ही तुम नजर आ रहे होते हो और जब मैं पास जाकर महसूस करती हूँ तो मुझे लगता है मैं भी तुम्हारे रंग में रंग गयी हूँ .... हाँ वही रंग हो गया है अब मेरा जो तुम्हारा रंग है ....हम एक ही रंग में रंगे हुए हैं अलग नहीं हैं एक दूसरे से .....
Comments
Post a Comment