कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ।जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ।हमें बचपन से ही सिखाया जाता है न कि आपको ऐसे मित्रों का साथ करना चाहिए जिनका व्यवहार संस्कार अच्छा हो जिससे हम भी वैसे ही बने ! अच्छे और संस्कारी लोगों के साथ रहने से उठने बैठने से हमरे अंदर वही भाव और विचार आते हैं तभी तो कबीर जी ने कहा है कि आप जैसा साथ करोगे वैसा ही फल पाओगे अगर आप मन के गुलाम हुए तो आपका तन भी वैसा ही बनेगा ! मन को वश में करना संसारी व्यक्ति के लिए संभव तभी है जब वो संयम के साथ रहे और मन के हिसाब से न चले !!सीमा असीम 25,3,20 

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