चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ।जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ।हमें बचपन से ही सिखाया जाता है न कि आपको ऐसे मित्रों का साथ करना चाहिए जिनका व्यवहार संस्कार अच्छा हो जिससे हम भी वैसे ही बने ! अच्छे और संस्कारी लोगों के साथ रहने से उठने बैठने से हमरे अंदर वही भाव और विचार आते हैं तभी तो कबीर जी ने कहा है कि आप जैसा साथ करोगे वैसा ही फल पाओगे अगर आप मन के गुलाम हुए तो आपका तन भी वैसा ही बनेगा ! मन को वश में करना संसारी व्यक्ति के लिए संभव तभी है जब वो संयम के साथ रहे और मन के हिसाब से न चले !!सीमा असीम 25,3,20
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पहाड़
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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