एक ही बार परखिये ना वा बारम्बार ।बालू तो हू किरकिरी जो छानै सौ बार॥मुझे ऐसा लगता है कि हम किसी भी इंसान को एक नजर देख कर भी पहचान जाते हैं कि वो कैसा व्यक्ति है और उसकी कैसी आदतें हैं ? लेकिन अगर जरूरत पड़े तो एक बार उसे जांच परख लो लेकिन उसे बार बार न जाँचों परखो क्योंकि रेत को कितनी भी बार छाना  जाये उसकी किरकिराहट वैसी ही बनी रहेगी उसके अंदर मुलायमियत नहीं आयेगी ठीक वैसे ही किसी मूर्ख दुष्ट व्यक्ति को कितनी ही बार उसे जाँच परख लो वो उसी तरह से अपनी मूर्खता से भरा रहेगा उसके अंदर जो दुष्टता का भाव है वो कभी कम नहीं होगा लेकिन एक सरल का व्यक्तित्व एक बार में ही समझ आ जाता है परंतु मूर्ख और दुष्ट व्यक्ति बार बार समझने के बाद भी समझ नहीं आता है ! सीमा असीम 30,2,20 x

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