बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

वाकई हमारे शब्द हमारी भाषा और हमारी बातें अनमोल हैं इनका  कोई भी मोल नहीं है मूल्य नहीं है और कभी हो भी नहीं सकता हमारी बोली कीमती और अमूल्य रत्न के समान है अगर इसे कोई खरीदना चाहे तो कितनी भी कीमत चुका कर खरीद नहीं सकता है इसलिए हमेशा बहुत सोच विचार के बाद ही अपने मुंह से कोई शब्द निकालने चाहिए क्योंकि एक बार मुंह से निकले शब्द वापस मुंह में नहीं जा सकते या लौटाए नहीं जा सकते ! यह शब्द और बातें ही होती हैं जिससे हम किसी को अपना बना सकते हैं या किसी को खो सकते हैं ......सीमा असीम 12,3,20 

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