हीरा परखै जौहरी शब्दहि परखै साध ।
कबीर परखै साध को ताका मता अगाध ॥
कबीर दास जी कितना सही कहते हैं कि असली हीरे की परख जौहरी ही कर सकता है और कोई नहीं बाकी के लिए तो वो पत्थर के समान है और शब्दों को कोई सच्चा गुरु या सच्चा साधक ही जान सकता है बाकी तो सब खाली शब्द ही समझेंगे जैसे कबीर कहते हैं कि एक साधू ही असाधु को पहचान पाता है क्योंकि उसकी बुद्धि बहुत गहन और गंभीर होती है ....सीमा असीम
4,4,20 

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