मुझे अब कुछ और दीवाना कर दे कि यह दुनिया मेरे काम की नहीं सच कहूँ तो दिल इतना उदास और परेशान है कि समझ ही नहीं आता है क्या करू ? क्या लिखूँ और क्या कहूँ ? मैं सब भूल गयी सच झूठ से परे हो गयी ,,, नहीं याद मुझे कि मैं तुम्हें जानती भी हूँ , पहचानती भी हूँ कि तुम वो नहीं हो जो तुम थे अब कोई और है कोई अलग सा व्यक्ति ,,, तुम एक इंसान ही रहते वो भी सही था लेकिन तुम इंसान नहीं बल्कि एक व्यक्ति बन गए कोई आम व्यक्ति ,,, जिसे मैं जानती थी , पहचानती और समझती थी वो कहीं मिट गया है ,,, असाधारण, अपरिमित, अनोखा और जादुई व्यक्तित्व वाला वो इंसान ...जिसे मेरे प्रेम ने हीरे की तरह चमका दिया था ,,, क्योंकि तराशा इतना कि हर कोना जगमगा उठा था ,,, फिर न जाने ऐसा क्या हुआ कि उसकी चमक धूमिल सी होने लगी धुंधलाने लगा अक्स ,,, मानों किसी ने उस पर मिट्टी उड़ेल दी हो किसी ने उसकी चमक को चुरा लिया हो ।,,,अचंभित हूँ सच में बहुत ही दुखी और तकलीफ में भी कि आखिर ऐसा क्यों कर हुआ ,,,,सनम तुझे याद कर कर के रोये बहुत हैं कि दम घुटने लगा है तुझे सोचती हूँ तो ...सीमा असीम 27,4,20
प्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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