मुझे अब कुछ और दीवाना कर दे कि यह दुनिया मेरे काम की नहीं सच कहूँ तो दिल इतना उदास और परेशान है कि समझ ही नहीं आता है क्या करू ? क्या लिखूँ और क्या कहूँ ? मैं सब भूल गयी सच झूठ से परे हो गयी ,,, नहीं याद मुझे कि मैं तुम्हें जानती भी हूँ , पहचानती भी हूँ कि तुम वो नहीं हो जो तुम थे अब कोई और है कोई अलग सा व्यक्ति ,,, तुम एक इंसान ही रहते वो भी सही था लेकिन तुम इंसान नहीं बल्कि एक व्यक्ति बन गए कोई आम व्यक्ति ,,, जिसे मैं जानती थी , पहचानती और समझती थी वो कहीं मिट गया है ,,, असाधारण, अपरिमित, अनोखा और जादुई व्यक्तित्व वाला वो इंसान ...जिसे मेरे प्रेम ने हीरे की तरह चमका दिया था ,,, क्योंकि तराशा इतना कि हर कोना जगमगा उठा था ,,, फिर न जाने ऐसा क्या हुआ कि उसकी चमक धूमिल सी होने लगी धुंधलाने लगा अक्स ,,, मानों किसी ने उस पर मिट्टी उड़ेल दी हो किसी ने उसकी चमक को चुरा लिया हो ।,,,अचंभित हूँ सच में बहुत ही दुखी और तकलीफ में भी कि आखिर ऐसा क्यों कर हुआ ,,,,सनम तुझे याद कर कर के रोये बहुत हैं कि दम घुटने लगा है तुझे सोचती हूँ तो ...सीमा असीम 27,4,20
चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
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