चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
रात गंवाई सोय कर दिवस गंवायो खाय ।हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाय ॥कबीर दास जी कहते हैं कि हमें इतना सुंदर मानव जीवन मिला है इससे कीमती दुनिया में कुछ हो ही नहीं सकता है लेकिन हम समझ ही नहीं पाते और अपने बहुमूल्य जीवन को रात में सोते हुए दिन में खाते हुए बिता देते हैं और हीरे से अमूल्य जीवन को बेकार की कामनाओं और वासनाओं में लिप्त होकर खत्म कर देते हैं इससे दुखद क्या हो सकता है ...सीमा असीम 16,4,20
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पहाड़
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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