कबीर बादल प्रेम का, हम पर बरसा आई ।
अंतरि भीगी आतमा, हरी भई बनराई ॥
अंतरि भीगी आतमा, हरी भई बनराई ॥
कहते हैं कि अगर एक बूंद भी मिल जाये तो
अन्तर्मन तक पवित्र हो जाता है लेकिन प्रेम का मिलना इतना सरल नहीं है न ही इतना
आसान है प्रेम को पा लेना ....बहुत मुश्किल है इस सफर में लेकिन सच्चे साधक चलते
रहते हैं दुख भोगते रहते हैं लेकिन कभी अपनी राह नहीं बदलते हैं तभी देखो कबीर जी क्या कहते
हैं कि प्रेम का बादल मेरे ऊपर बरस रहा है जिस कारण मेरी अंतरात्मा तक पवित्र हो
गयी है और प्रेम रस में तरबतर हो गयी है और मेरे आसपास का पूरा माहौल हरा भरा हो
गया है ,, खुशियों से भर गया है ,,, यह अपूर्व और अद्भुत प्रेम के
कारण ही तो हुआ है ,,,, हम सब इसी प्रेम में ही क्यों नहीं अपने जीवन को बिताते हैं क्यों
इस प्रेम से वंचित रहते हैं
सीमा असीम
5,4,20
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