कबीर प्रेम न चक्खिया,चक्खि न लिया साव।सूने घर का पाहुना, ज्यूं आया त्यूं जाव॥कबीर दास जी कहते हैं कि जो इंसान प्रेम नहीं करता या जिसके मन में प्रेम की कोई भावना नहीं है उसका जीवन निरर्थक है व्यर्थ है ,, और उसका जीना कोई जीना नहीं  है क्योंकि प्रेम का स्वाद न चखना और जीवन गवा देना उसी प्रकार है जैसे कोई मेहमान किसी सुने घर में आता है और बिना कुछ पाये यूं ही चला जाता है खाली हाथ ही ,,,,सीमा असीम 12,4,20 x

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