हामारी सोच,,, ,,,
हमारी सोच ही हमें बनाती है और बिगाड़ भी देती है ,, हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन भी जाते हैं और फिर कोई हमें अच्छी या बुरी उस सोच से नहीं निकाल सकता ,, हम स्वयम ही उस सोच से निजात पा सकते हैं इसलिए हमें वही सोचना चाहिए जो हम बनना चाहते हैं और यकीनन आप बिलकुल वैसे ही बन जाओगे जैसा आप बनना चाहते हो !!

सीमा असीम
16, 2, 20 

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