हमने तो दुनिया को बाँटी थी मुस्कान
मेरी आँखों में आँसू हैं तो आखिर क्यों
दिल हमेशा यही कहता रहता है कि क्या गुनाह किए थे क्या अपराध किया कोई जो आँख नम हो जाती हैं बार बार उदासी में घिर जाती हूँ न जाने क्यों सोचती हूँ तुम्हें और दुनिया को ? और सोच सोच कर खुद को ही तबाह कर लेती हूँ मिटा लेती हूँ मैं खुद को .... अगर मैं हूँ तब ही यह दुनिया है बस यही नहीं सोच पाती और दुखों से नाता जोड़े रहती हूँ जबकि खुशियाँ हमारे आसपास हैं और हम मूरखों की तरह से अपने आप को दुख के सागर में डुबाये रहते हैं  ,,,,,,
मुस्कान सजा होठों पर और गम को गले लगा ले
गम रहेंगे साथ तो खुशियाँ खुद आयेंगी ,,,,
सीमा असीम
24,2,20

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद