ना जाने कौन है जो मुझे संभालता है
पोछ देता है अश्क और सकूँ देता है
सुनो ऐसा ही है मुझे जब बेहद दर्द से गुजरना होता है और जिस्म बेजान हो जाता है तब कोई अनजानी सी शक्ति आकर मुझे सहारा देती है और हर कष्ट दर्द और तकलीफ से निकाल लेती है ...... वैसे मैंने महसूस किया है मैं जब भी बहुत खुश होती हूँ खूब मुसकुराती हूँ उसके बाद मुझे जितना हंसी हूँ उससे कई गुना ज्यादा रोना पड़ता है और दर्द से मर जाना होता है मैं जीते जी मर जाती हूँ ,,,,,फिर ठान लेती हूँ अब कभी नहीं हंसुंगी लेकिन तुम मुझे हंसा देते हो रोम रोम खिला देते हो और उसके कुछ ही पलों के बाद कष्ट डेरा बना लेता है खुशी से खिला रोम रोम दर्द से भर जाता है और पिघलने लगता है मन बहने लगते आँसू ,,,वे आँसू मेरी आत्मा से निकलते हैं मुझे तड़पा तड़पा कर बेचैन कर देते है इतना बेचैन कि मेरा हर रोया दिल बन जाता है , मन बन जाता है , आँख बन जाता है और फिर रोता है जार जार ,,,, मुझे मिटाते हुए ,,,,,,
क्यो होता है दर्द क्या तुम बताओगे मुझे
या यूं समझूँ मैं न मुस्कुराऊँ कभी ॥
सीमा असीम
18,2,20
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