सारी रात आँसू बहते हैं
सारी रात दर्द होता है
क्या यह तेरा प्रेम बह रहा है
या तेरी बेवफ़ाई
क्या है
समझ कर भी नासमझ हूँ मैं
सच में मैं समझना नहीं चाहती
फिर क्यों तुम मुझे बार बार अहसास कराते हो
बोलो क्या चाहते हो मैं मर जाऊँ
हाँ तुम यही चाहते हो क्योंकि
तुम स्वार्थी हो और तुम्हें कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला
मेरे रोने से दुखी होने से
तभी तो कभी भी परवाह नहीं करते
पुछते नहीं मेरा हाल और न ही कभी
मेरे दर्द को समझते
मैं जानती हूँ तुम्हारे सारे सच और अपने भी
लेकिन मैं नहीं चाहती कि तुम्हें कभी कहूँ या
कभी तुम्हें उसका अहसास भी हो
मैं नहीं चाहती तुम्हें दुख देना
मैं नहीं चाहती तुम्हें कोई  कष्ट हो
मैं अपने दर्द को अकेले ही सहती रहती हूँ
क्योंकि मैं सच्चा प्रेम करती हूँ
और तुम मेरे तन और धन से प्रेम करते हो
कभी मेरे मन को नहीं समझते
एक दिन जब सब कुछ बचा रहेगा दुनिया में
तब मैं नहीं हौंगी और न ही नाममात्र का कहीं पर भी प्रेम होगा
नहीं रहेगा प्रेम
मेरे मरते ही खत्म हो जाएगा प्रेम
स्वार्थी दुनिया में प्रेम का कोई काम नहीं होता है
कोई ढूँढता रहे तड़पता रहे और मर भी जाए तब भी कहाँ पा सकेगा प्रेम
क्योंकि आज प्रेम की कदर नहीं है और कल प्रेम नहीं बचेगा ~!!

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