नम है आँख दर्द छलक गया तेरी हर बात कमाल जो है सुनो, मैं अगर सच कहूँ तो आँखों का छलकना खुशी में भी होता है और गम में भी लेकिन छलक़ती आँख ही है भले ही दिल खुश हो या दुखी ! इस दुनिया में कुछ भी शाश्वत नहीं है ,,शायद प्रेम भी अब शाश्वत नहीं रहा ,,, क्योंकि इस नश्वर दुनिया में स्वार्थ हद से ज्यादा बढ़ रहा है ,,, हद से ज्यादा खुद के प्रति सोचना ही इंसान को पाप का भागी बना रहा है ,,,,खैर क्या फर्क पड़ता हैकि iइस दुनिया मे क्या हो रहा है ,, क्या घट रहा है , , फर्क तो तब पड़ता है जब हामरे अपने गलत हो या कुछ गलत कर रहे हो ....
सीमा असीम
26,2,20
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